सीजी भास्कर, 13 अक्टूबर : सरकारी राशन के चावल से जुड़े दो अलग-अलग मामले सामने आने के बाद खाद्य विभाग (PDS Rice Irregularities) की कार्रवाई और जब्त चावल की सुपुर्दगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक मामले में वार्ड क्रमांक 2 की शासकीय उचित मूल्य दुकान से चावल ले जा रही गाड़ी को कांग्रेस पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने पकड़ा और खाद्य विभाग को सूचना दी।
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इसके बाद पुलिस गाड़ी को थाने ले गई। वहीं, दूसरे मामले में रास्ते में बिचौलियों के कब्जे से चावल से भरी गाड़ी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों घटनाओं के बाद सरकारी राशन में अनियमितता (PDS Rice Irregularities) की आशंका के बीच कार्रवाई का स्पष्ट विवरण सामने लाने की मांग उठ रही है। दोनों मामले अलग-अलग हैं, इसलिए इनकी जांच और कार्रवाई का ब्योरा भी अलग-अलग सामने आना चाहिए। फिलहाल, जब्त चावल की मात्रा, उसकी सुपुर्दगी और संबंधित लोगों पर हुई कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
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दो मामले, कार्रवाई पर सवाल
वार्ड क्रमांक 2 की शासकीय उचित मूल्य दुकान से चावल ले जा रही गाड़ी को पकड़े जाने के मामले में कांग्रेस पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने खाद्य विभाग को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस गाड़ी को थाने ले गई। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और चावल की सुपुर्दगी को लेकर जानकारी की जरूरत है। दूसरी ओर, रास्ते में बिचौलियों के कब्जे से चावल से भरी गाड़ी पकड़े जाने का मामला भी सामने आया है। इसे पहले प्रकरण से अलग बताया जा रहा है। ऐसे में दोनों घटनाओं में पकड़े गए चावल की मात्रा, उसके स्रोत और विभागीय कार्रवाई का अलग-अलग विवरण सामने आना जरूरी है। इससे दोनों मामलों को लेकर भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा।
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अधिकारी से मांगी जानकारी
दोनों मामलों की जानकारी और कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए खाद्य अधिकारी श्रद्धा चौहान से संपर्क किया गया। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेने की बात कही। ऐसे में विभाग की ओर से आधिकारिक विवरण आने का इंतजार है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चावल कहां से आया, उसे कहां ले जाया जा रहा था, जब्त खाद्यान्न की सुपुर्दगी किसे दी गई और संबंधित प्रकरणों में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। खाद्य विभाग की कार्रवाई (PDS Rice Irregularities) से जुड़े इन सवालों के जवाब मिलने पर ही दोनों मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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सभी दुकानों की जांच मांग
दो अलग-अलग घटनाओं के सामने आने के बाद अंचल की सभी शासकीय उचित मूल्य दुकानों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठ रही है। इसके तहत दुकानों को मिले चावल के आवंटन, वितरण रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया जाना चाहिए। इस जांच से पता चल सकेगा कि रिकॉर्ड में दर्ज खाद्यान्न और दुकानों में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच कोई अंतर तो नहीं है। साथ ही, हितग्राहियों को मिलने वाले राशन की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकती है। राशन दुकानों के स्टॉक की जांच (PDS Rice Irregularities) से खाद्यान्न के आवंटन और वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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आधिकारिक रिकॉर्ड जरूरी
सरकारी राशन जरूरतमंद परिवारों के खाद्य सुरक्षा अधिकार से जुड़ा है। इसलिए इससे संबंधित मामलों में पारदर्शिता और समय पर कार्रवाई की जानकारी महत्वपूर्ण है। दोनों प्रकरणों का रिकॉर्ड अलग-अलग सामने आने से यह स्पष्ट होगा कि प्रत्येक मामले में क्या कार्रवाई हुई और जब्त चावल की सुपुर्दगी किस प्रक्रिया के तहत की गई। फिलहाल, दोनों मामलों में चावल की मात्रा, सुपुर्दगी और कार्रवाई का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है। राशन वितरण में पारदर्शिता (PDS Rice Irregularities) सुनिश्चित करने के लिए विभाग को दोनों मामलों की स्थिति स्पष्ट करने के साथ सभी राशन दुकानों के स्टॉक की जांच की मांग पर भी ध्यान देना चाहिए।
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