सीजी भास्कर, 16 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के बड़ेबेंद्री गांव के सुरेश देवांगन ने कृषि उपकरणों के कारोबार में अपनी पहचान बनाई है। कभी गांव-गांव जाकर किसानों को कृषि उपकरण किराये पर उपलब्ध कराने वाले सुरेश आज अपनी निर्माण इकाई (Kisan Mitan Agro) के जरिए करीब 7 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर हासिल कर चुके हैं। उनके उद्योग से 25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।
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किराये से शुरू हुआ सफर
सुरेश देवांगन ने ग्रामीण इलाकों में आधुनिक कृषि उपकरणों की कमी को करीब से देखा। किसानों को जरूरत के समय उपकरण नहीं मिल पाते थे। इस समस्या को समझते हुए उन्होंने थ्रेशर मशीनें लेकर गांव-गांव जाना शुरू किया और किसानों को किराये पर उपकरण देने लगे।
बाद में उन्होंने थ्रेशर और रोटावेटर की डीलरशिप लेने की योजना बनाई। कृषि उपकरणों की मांग बढ़ने पर दूसरे जिलों और राज्यों से ट्रॉलियां मंगाकर बेचने लगे। हालांकि, समय पर डिलीवरी नहीं मिलने से ग्राहकों को परेशानी होती थी। इसी चुनौती ने उन्हें कोंडागांव में ही कृषि उपकरण बनाने की इकाई स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
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सरकारी योजना से मदद
उद्योग स्थापित करने के लिए सुरेश ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, कोंडागांव से संपर्क किया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (Kisan Mitan Agro) के तहत उन्हें उद्योग स्थापना के लिए मार्गदर्शन मिला। योजना के अंतर्गत बैंक ऑफ बड़ौदा से 50 लाख रुपये का ऋण मिला, जबकि 12.50 लाख रुपये की सब्सिडी भी स्वीकृत हुई।
इस वित्तीय सहायता से उन्होंने रायपुर नाका, कोंडागांव के पास ‘किसान मितान एग्रो’ नाम से कृषि उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की। यहां कृषि ट्रॉलियों सहित विभिन्न प्रकार की मशीनों और उपकरणों का निर्माण शुरू किया गया।
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20 लाख से 7 करोड़
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कृषि उपकरणों का निर्माण करने से कारोबार को विस्तार मिला। सुरेश देवांगन की इकाई (Kisan Mitan Agro) का शुरुआती कारोबार करीब 20 लाख रुपये बताया गया है, जो अब लगभग 7 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच गया है।
सुरेश भविष्य में कारोबार को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद स्थानीय किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो रहे हैं, क्योंकि कृषि ट्रॉलियां और अन्य उपकरण अब आसपास के क्षेत्र में ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
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25 लोगों को रोजगार
किसान मितान एग्रो (Kisan Mitan Agro) में 25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इससे स्थानीय परिवारों को आय का साधन मिला है। वहीं, किसानों को उपकरण खरीदने के लिए दूसरे जिलों और राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। इससे समय और परिवहन खर्च बचने की संभावना है। सफल उद्यमी के रूप में पहचान बनाने वाले सुरेश देवांगन ने उद्योग विभाग की योजना से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
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