सीजी भास्कर, 28 अक्टूबर । हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता पार्वती को ‘अपर्णा’ नाम क्यों दिया गया और इस नाम के पीछे त्याग व कठिन तपस्या की कौन-सी पौराणिक कथा जुड़ी है? (Karwa Chauth Maa Parvati Aparna Katha)
यह भी पढ़ें : Karwa Chauth 2025 Moonrise Time : कब दिखेगा चांद? जानें आपके शहर का सही चंद्रोदय समय
माता पार्वती को अपर्णा क्यों कहा गया? : Karwa Chauth Maa Parvati Aparna Katha
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने सुख-सुविधाओं का त्याग कर साधना की। कथा के अनुसार, शुरुआत में वे कंद-मूल और फल खाकर तप करती थीं। समय के साथ उन्होंने भोजन कम कर दिया और फिर पेड़ों से गिरे सूखे पत्तों पर निर्भर रहने लगीं।
मान्यता है कि तपस्या के दौरान एक समय ऐसा आया, जब माता पार्वती ने सूखे पत्तों का सेवन भी पूरी तरह छोड़ दिया। संस्कृत में पत्ते को ‘पर्ण’ कहा जाता है। पर्ण का त्याग करने के कारण माता पार्वती ‘अपर्णा’ नाम से प्रसिद्ध हुईं। यह नाम उनके दृढ़ संकल्प, धैर्य और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
यह भी पढ़ें : Vat Purnima : इस महीने आएगा बेहद शुभ दिन, सुहागिन महिलाओं के लिए खास रहेगा यह पर्व, जान लें सही समय

करवा चौथ के निर्जला व्रत से क्या है संबंध?
करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, माता पार्वती की तपस्या की कथा उनके त्याग और भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाती है। इसी वजह से करवा चौथ (Karwa Chauth Maa Parvati Aparna Katha) पर माता पार्वती की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं उनसे अखंड सौभाग्य, प्रेम, विश्वास और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं।
करवा चौथ 2026 कब है? : Karwa Chauth Maa Parvati Aparna Katha
साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं परंपरा के अनुसार पूजा करेंगी और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी। पूजा और चंद्रोदय का सटीक समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है।
ख़बरें और भी हैं :Bhoramdev Safari : घने जंगलों के बीच शुरू हुआ नया रोमांच, क्या खास है भोरमदेव जंगल सफारी में



