सीजी भास्कर, रायपुर 01 नवंबर। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 60 वर्षीय मरीज की छाती में दिल के पास मौजूद कैंसर की गांठ (Raipur Cancer Surgery) का सफल ऑपरेशन किया है। करीब चार घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में लगभग 5 सेंटीमीटर का ट्यूमर निकाला गया। गांठ हृदय की प्रमुख रक्त वाहिकाओं, बाएं फेफड़े और आसपास के अंगों से चिपकी हुई थी। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और मरीज की जान को खतरा होने की आशंका थी। ऐसे में कैंसर सर्जरी और हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया। सर्जरी के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
छाती में दर्द की शिकायत
डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज को छाती में दर्द और भारीपन महसूस हो रहा था। निजी अस्पताल में बायोप्सी जांच के बाद उसे इनवेसिव थाइमोमा होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद मरीज को कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी दी गई। आगे के इलाज के लिए उसे अंबेडकर अस्पताल लाया गया। कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन में छाती के भीतर 5×4.3×2.5 सेंटीमीटर की गांठ दिखाई दी। यह महाधमनी (एओर्टा), पल्मोनरी आर्टरी, बाएं फेफड़े और हृदय की बाहरी झिल्ली से चिपकी हुई थी। डॉक्टरों के सामने इन प्रमुख रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर निकालने की बड़ी चुनौती थी।
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धमनियों से चिपका था ट्यूमर
डॉक्टरों के अनुसार, ट्यूमर (Invasive Thymoma Surgery) महाधमनी और हृदय की अन्य प्रमुख रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब था। ऑपरेशन के दौरान महाधमनी को नुकसान पहुंचने पर अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता था। इससे मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। दोनों विभागों के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन की योजना बनाई। छाती के बीच में चीरा लगाकर गांठ तक पहुंच बनाई गई। ट्यूमर आसपास के अंगों से मजबूती से चिपका हुआ था, इसलिए उसे अलग करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
झिल्ली और फेफड़े का हिस्सा निकाला
ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के लिए डॉक्टरों को हृदय की बाहरी झिल्ली और बाएं फेफड़े का कुछ हिस्सा भी निकालना पड़ा। करीब चार घंटे तक चली सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर हो गई। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
क्या है इनवेसिव थाइमोमा
थाइमोमा छाती में हृदय के सामने स्थित थाइमस ग्रंथि में बनने वाला ट्यूमर है। इनवेसिव थाइमोमा सामान्य थाइमोमा की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि यह आसपास के अंगों और ऊतकों तक फैल सकता है। बीमारी की स्थिति और उसके फैलाव के आधार पर इसके इलाज में कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इस मरीज के मामले में भी पहले कीमोथेरेपी और रेडिएशन के बाद जटिल ऑपरेशन किया गया।
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विशेषज्ञों की टीम ने किया ऑपरेशन
इस जटिल सर्जरी (Raipur Cancer Surgery) का नेतृत्व डॉ. आशुतोष गुप्ता और डॉ. केके साहू ने किया। टीम में डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सोनम, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. आशीष मालव, डॉ. गौरव और डॉ. अक्षय शामिल रहे। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. संकल्प ने भी ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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