सीजी भास्कर, रायपुर 01 नवंबर 2026। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Development Journey) ने 26 साल का सफर पूरा कर लिया है। राज्य गठन के समय सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के क्षेत्र में प्रदेश के सामने कई चुनौतियां थीं। दूर-दराज के गांवों और आदिवासी इलाकों तक विकास पहुंचाना भी बड़ी जिम्मेदारी थी। अब 26 साल बाद प्रदेश के बजट का आकार 7,294 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। निवेश में 247 गुना वृद्धि का दावा किया गया है। हालांकि, विकास के इन आंकड़ों के बीच आम लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना अब भी अहम चुनौती है।
7,294 करोड़ से 1.72 लाख करोड़
राज्य गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने वर्ष 2001-02 में छत्तीसगढ़ का पहला बजट पेश किया था। इसका आकार 7,294 करोड़ रुपये था। वर्ष 2002-03 में बजट बढ़कर 8,471 करोड़ और 2003-04 में 9,978 करोड़ रुपये हो गया।
2003 में सत्ता परिवर्तन के बाद वित्त मंत्री अमर अग्रवाल के कार्यकाल में वर्ष 2004-05 का बजट 10,555 करोड़ और 2006-07 में 13,185 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाली और लगातार 12 बजट पेश किए। इस दौरान वर्ष 2007-08 का 16,473 करोड़ रुपये का बजट बढ़कर 2017-18 में 88,599 करोड़ रुपये हो गया।
2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल ने वित्त विभाग संभाला। उनके कार्यकाल में बजट का आकार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा। 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद भी बजट में विस्तार जारी रहा। वर्ष 2026-27 में प्रदेश का बजट 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तरह राज्य गठन के शुरुआती बजट की तुलना में बजट का आकार 23 गुना से अधिक हो गया है।
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निवेश में 247 गुना उछाल
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की अहम भूमिका रही है। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और चूना पत्थर आधारित उद्योगों ने प्रदेश को औद्योगिक पहचान दिलाई है। राज्य गठन के बाद बिजली, इस्पात और सीमेंट उद्योगों का भी विस्तार हुआ। विकास यात्रा से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में निवेश 247 गुना बढ़ा है।
वर्ष 2026-27 के बजट में खनन क्षेत्र से 19 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण में 98 गुना वृद्धि का दावा किया गया है। इसके अलावा सिंचाई का रकबा दोगुना, खरीफ उत्पादन तीन गुना और रबी उत्पादन छह गुना होने की बात कही गई है। ये आंकड़े राज्य की आर्थिक और कृषि गतिविधियों में हुए विस्तार को दर्शाते हैं।
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स्वास्थ्य और शिक्षा का विस्तार
स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में भी प्रदेश में संस्थागत विस्तार हुआ है। राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल 7 जिला अस्पताल और एक मेडिकल कॉलेज था। अब जिला अस्पतालों की संख्या बढ़कर 30 और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 16 हो गई है। नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की गई है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी साक्षरता दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रदेश की साक्षरता दर करीब 65 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना अब भी बड़ी चुनौती है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव
छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद लंबे समय तक बड़ी बाधा बना रहा। बस्तर के कई इलाकों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और संचार सुविधाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। सुरक्षा बलों के अभियानों, नए सुरक्षा कैंपों और सरकारी योजनाओं के विस्तार से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों की पहुंच बढ़ी है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों में 516 नक्सलियों को मार गिराया। इस दौरान 2,587 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा अभियानों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास कार्यों का दायरा भी बढ़ाया गया है।
अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना चुनौती
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Development Journey) ने 26 साल में बजट, निवेश, स्वास्थ्य संस्थानों, सड़कों और कृषि उत्पादन के क्षेत्र में विस्तार दर्ज किया है। लेकिन किसी भी राज्य के विकास का आकलन केवल सरकारी खर्च और आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता। ग्रामीण युवाओं को रोजगार, किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी, आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब भी विकास की अहम कसौटियां हैं। आने वाले वर्षों में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना होगा।



