सीजी भास्कर, 8 सितम्बर |
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर (Raipur Heavy Rain) समेत बिलासपुर और सरगुजा संभाग में रविवार देर शाम जोरदार बारिश हुई। लगातार हो रही वर्षा ने एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत दी तो दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
इस बीच मौसम विभाग ने प्रदेश के 21 जिलों में भारी बारिश, बिजली और तेज़ हवा (Thunderstorm Alert in Chhattisgarh) को लेकर चेतावनी जारी की है।मानसून का 86% कोटा पूरा
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6 सितंबर तक छत्तीसगढ़ में 977.9 मिमी बारिश हो चुकी है, जो औसतन होने वाली वर्षा का करीब 86 प्रतिशत है।
सामान्य तौर पर प्रदेश में हर साल लगभग 1143.3 मिमी बारिश दर्ज की जाती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार मानसून औसत से ज्यादा सक्रिय रह सकता है और सितंबर-अक्टूबर तक बारिश का दौर (Monsoon Activity) जारी रहेगा।किन जिलों में जारी हुआ अलर्ट?
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए इन जिलों में बिजली के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है –
बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, रायगढ़, जशपुर, दुर्ग, बेमेतरा, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर।मानसून द्रोणिका एक्टिव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की द्रोणिका (Monsoon Trough Line) इस समय जैसलमेर – पेंड्रा रोड – दमोह – गुना – संबलपुर – गोपालपुर – बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। यही वजह है कि प्रदेश में लगातार वर्षा की गतिविधियां हो रही हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति
पिछले हफ्ते उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अतिभारी वर्षा (Heavy Rainfall in Chhattisgarh) से कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी।- कोरबा जिले में बांध टूटने से दर्जनों गांव डूब गए।
- बलरामपुर में बांध फूटने से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
- बस्तर संभाग में 200 से ज्यादा मकान ढह गए और 2196 लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट करना पड़ा।
24 घंटे में कहां-कितनी बारिश?
- दंतेवाड़ा, बास्तानार, बेलरगांव, मैनपुर, भानपुरी और तखतपुर – 20-20 मिमी
- बीजापुर और दुर्गकोंदल – 1-1 सेमी
- रायपुर – हल्की वर्षा, आसमान बादलों से घिरा
क्यों बनता है Low Pressure Area?
लो प्रेशर एरिया (Low Pressure Area) तब बनता है जब किसी इलाके में तापमान बढ़ने से हवा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है। नीचे दबाव कम होने पर आसपास की हवा खिंचकर उस जगह आती है, जिससे बादल और बारिश का निर्माण होता है।
यही लो प्रेशर एरिया कई बार डीप डिप्रेशन और चक्रवात (Cyclone) का रूप ले लेता है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले यही सिस्टम देशभर में बारिश करवाते हैं।बिजली क्यों गिरती है?
आकाशीय बिजली (Lightning Strike) बादलों में मौजूद ऊर्जा के टकराने से पैदा होती है। जब यह बिजली धरती की सतह पर किसी संवाहक (Conductor) – जैसे पेड़, बिजली के खंभे या इंसान – के संपर्क में आती है तो बड़ा हादसा हो सकता है।तथ्य जानिए –
- आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य की सतह से भी ज्यादा होता है।
- यह मिली सेकेंड से भी कम समय के लिए धरती पर ठहरती है।
- सबसे अधिक असर सिर, गले और कंधों पर होता है।
छत्तीसगढ़ में बारिश के आंकड़े
- बलरामपुर – 1329.9 मिमी (59% अधिक)
- बेमेतरा – 458.4 मिमी (49% कम)
- प्रदेश औसत – 976.5 मिमी (1 जून – 5 सितंबर तक)





