सीजी भास्कर, 27 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में 29 अक्टूबर से नया रोस्टर (Chhattisgarh High Court Roster 2025) लागू होने जा रहा है। नए रोस्टर के तहत अदालत में चार डिवीजन बेंच (Division Bench) और 16 सिंगल बेंच (Single Bench) में मामलों की सुनवाई होगी। इस व्यवस्था के साथ कई महत्वपूर्ण मामलों जैसे जनहित याचिकाएं, आपराधिक अपीलें, अवमानना और कर संबंधी प्रकरणों की सुनवाई तय हो गई है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभुदत्त गुरु
पहली डिवीजन बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभुदत्त गुरु करेंगे। यह बेंच निम्नलिखित मामलों की सुनवाई करेगी, जिसमें जनहित याचिकाएं (Public Interest Litigations), बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), रिट पिटीशन (क्रिमिनल), अवमानना याचिकाएं, धारा 482 CrPC के तहत आवेदन और वर्ष 2020 तक की आपराधिक अपीलें शामिल हैं।
दूसरी डिवीजन बेंच
जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल दूसरी डिवीजन बेंच की सुनवाई करेंगे। इसमें बेंच उन सभी मामलों की सुनवाई करेगी जो किसी अन्य डिवीजन बेंच में नहीं भेजे गए हैं। इसके साथ ही वैवाहिक मामलों से संबंधित प्रथम अपीलें (Family & Matrimonial Appeals) भी इसी बेंच में सुनी जाएंगी।
तीसरी डिवीजन बेंच
जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल होंगे। तीसरी डिवीजन बेंच में निम्नलिखित मामलों पर सुनवाई होगी, कमर्शियल अपील (Commercial Appeals, वर्ष 2016 तक की इक्विटल अपीलें (Acquittal Appeals), सेक्शन 378 CrPC के तहत लीव टू अपील (Leave to Appeal Applications) के केस सुने जाएंगे।
चौथी डिवीजन बेंच
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद होंगे। यह बेंच सभी सिविल मामलों की सुनवाई करेगी जो किसी अन्य डिवीजन बेंच को आवंटित नहीं किए गए हैं। साथ ही निम्नलिखित मामलों पर भी सुनवाई होगी, जिसमें कंपनी अपील, टैक्स से जुड़े विवाद, वर्ष 2015 तक की इक्विटल अपीलें, अन्य सभी रिट मामले सुने जाएंगे।
16 सिंगल बेंचों में भी होगी सुनवाई
नए रोस्टर में कुल 16 सिंगल बेंच निर्धारित की गई हैं। इनमें मुख्य न्यायाधीश की स्पेशल सिंगल बेंच सहित अन्य न्यायाधीशों की सिंगल बेंच भी शामिल हैं। हर सिंगल बेंच को अलग-अलग श्रेणी के सिविल, आपराधिक, सेवा और याचिका संबंधी मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। हाई कोर्ट प्रशासन का मानना है कि इस नए रोस्टर से मामलों की सुनवाई तेज और पारदर्शी होगी। हर न्यायाधीश को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार विषय दिए गए हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।


