सीजी भास्कर, 19 अगस्त : बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल (Bastar School News) तक पहुंचने के बाद भी कई जगह उन्हें सुरक्षित कक्षा का इंतजार है। सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों के कारण कई जगह नियमित कक्षाएं दूसरे स्थानों पर लगानी पड़ रही हैं। बारिश के मौसम में छत और भवन की खराब स्थिति से बच्चों और शिक्षकों की परेशानी और बढ़ गई है।
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बस्तर में 124 स्कूल भवन अति जर्जर
बस्तर जिले में कुल 124 स्कूल भवन अति जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनमें 76 प्राइमरी और 48 मिडिल स्कूल शामिल हैं। कई भवनों की हालत इतनी खराब है कि वहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल ने 124 स्कूल भवनों के अति जर्जर होने की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे स्कूलों की कक्षाएं सुरक्षित स्थानों पर संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पंचायत भवन में लग रही कक्षाएं
तोकापाल क्षेत्र के एर्राकोर्ट मिडिल स्कूल (Bastar School News) की स्थिति इस समस्या की गंभीरता बताती है। स्कूल भवन अति जर्जर होने के कारण यहां की पूरी कक्षाएं पंचायत भवन में संचालित की जा रही हैं।
वहीं कुछ अन्य स्कूलों में बच्चों को अतिरिक्त भवनों, लैब या प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे फिलहाल बच्चों को जर्जर भवनों से दूर रखा जा रहा है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई करना भी अपने आप में चुनौती है।
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सुरक्षा के लिए भेजी गई जर्जर भवनों की जानकारी
शिक्षा विभाग ने जर्जर स्कूल भवनों की जानकारी शासन और प्रशासन को भेजी है। विभाग की ओर से सुरक्षित स्थानों पर कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना का खतरा न रहे। हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। जर्जर भवनों की जगह नए और सुरक्षित भवनों का निर्माण जरूरी है।
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अभिभावकों को नए भवन का इंतजार
Bastar School News (बस्तर स्कूल) की इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ रही है। उनका सवाल है कि जर्जर भवनों की जगह नए स्कूल भवन कब बनेंगे और बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कब मिलेगी।
बारिश के दौरान स्कूल भवनों की स्थिति और खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। स्कूलों में बेहतर और सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है।
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