सीजी भास्कर, 19 अगस्त : नगर निगम चुनाव (Birgaon Municipal Election) से पहले वार्डों के आरक्षण ने कई दावेदारों का गणित बदल दिया है। नए आरक्षण के बाद कुछ मौजूदा पार्षदों के लिए अपने पुराने वार्ड से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया है, जबकि कई नेताओं को नए समीकरण में अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका मिला है। 40 वार्डों वाले निगम में 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
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बीरगांव में नए सिरे से हुआ वार्ड आरक्षण
रायपुर जिले के बीरगांव नगर निगम में मंगलवार को आगामी चुनाव के लिए वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। परिसीमन लागू होने के कारण सभी 40 वार्डों का नए सिरे से आरक्षण किया गया। इनमें 14 वार्ड महिलाओं के लिए और 7 वार्ड एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा ओबीसी और ओबीसी महिला वर्ग के लिए भी वार्ड आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षण प्रक्रिया में पहले एससी-एसटी वर्ग के वार्ड तय किए गए। इसके बाद ओबीसी और ओबीसी महिला वर्ग के लिए लॉटरी निकाली गई। आरक्षण की तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
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इकराम और मोहम्मद रियाज के वार्ड बदले
नए आरक्षण से चार बार के पार्षद इकराम अहमद और दो बार के पार्षद मोहम्मद रियाज के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। दोनों के वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुए हैं। महापौर नंदलाल देवांगन का वार्ड भी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। ऐसे में वे पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। साथ ही महापौर पद के लिए अपनी पत्नी के नाम पर दावेदारी की संभावना भी बन गई है।
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कई पुराने दावेदारों के वार्ड महिला आरक्षित
कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद सुदन सिकली का वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। पिछली बार इसी वार्ड से उनकी पत्नी कविता चुनाव जीती थीं। वहीं भाजपा के होरीलाल देवांगन का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हुआ है। ऐसे में उनके दोबारा वार्ड 32 से चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है। आरक्षण के बाद दोनों प्रमुख दलों में ऐसे वार्डों पर नए चेहरों की तलाश भी शुरू हो सकती है, जहां मौजूदा पार्षद अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
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पिछली बार कांग्रेस को मिली थी बढ़त
पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 19 वार्डों में जीत दर्ज की थी। भाजपा को 10, जोगी कांग्रेस को 5 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 6 वार्डों में जीत मिली थी। उस समय जोगी कांग्रेस को पूर्व पालिका अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश देवांगन का समर्थन मिला था। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। छह निर्दलीय पार्षदों ने भी भाजपा और कांग्रेस में से अलग-अलग पक्षों को समर्थन दिया था। इसी राजनीतिक समीकरण के चलते नंद कुमार देवांगन महापौर बने थे।
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भाजपा में शामिल हो चुके हैं कई पुराने चेहरे
इस बार राजनीतिक परिस्थितियां पहले के मुकाबले काफी बदल चुकी हैं। जोगी कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे अब भाजपा के साथ हैं। एवज देवांगन और उनकी पत्नी डिगेश्वरी देवांगन भी पिछली बार जोगी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। अब दोनों भाजपा में हैं। डिगेश्वरी देवांगन के नाम की चर्चा महापौर पद की दावेदारी के लिए भी हो सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर दोनों दलों में टिकट वितरण के बाद ही साफ होगी।
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महिला दावेदारों पर बढ़ेगी नजर
आरक्षण के बाद महापौर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस में महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ सकती है। कई मौजूदा पार्षदों को अब नए वार्ड की तलाश करनी होगी, जबकि कुछ नेताओं के लिए आरक्षण ने दोबारा चुनाव लड़ने का रास्ता आसान कर दिया है।
बीरगांव नगर निगम चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के आसार बन रहे हैं। जोगी कांग्रेस के कमजोर होने और उसके कई नेताओं के भाजपा में जाने के बाद मुकाबले का स्वरूप बदल गया है। अब आरक्षण के बाद दोनों दल किसे टिकट देते हैं, इसी पर चुनावी समीकरण काफी हद तक निर्भर करेगा।
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