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Central University Employees Case : 109 कर्मचारियों के हक पर सुप्रीम मुहर, गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी को नहीं मिली राहत; क्यूरेटिव पिटीशन खारिज

By Newsdesk Admin
06/01/2026
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Central University Employees Case
Central University Employees Case

सीजी भास्कर, 06 जनवरी। बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी को 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में एक बार फिर बड़ा झटका (Central University Employees Case) लगा है। ]

Contents
  • राज्य से केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने तक का पूरा विवाद
  • हाईकोर्ट से शुरू हुई कानूनी लड़ाई
  • डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट से भी यूनिवर्सिटी को झटका
  • 16 साल की लड़ाई, कई कर्मचारियों को नहीं मिला न्याय

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय द्वारा दायर क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों पर अंतिम न्यायिक मुहर लग गई है, जिसके तहत सभी 109 कर्मचारियों को नियमित मानते हुए उनके समस्त देयकों का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

राज्य से केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने तक का पूरा विवाद

दरअसल, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में कार्यरत 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ शासन के 5 मार्च 2008 के नियमितीकरण आदेश के आधार पर 26 अगस्त 2008 को नियमित (Central University Employees Case) किया गया था। इसके बाद 15 जनवरी 2009 को विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय में रूपांतरण के साथ ही ये सभी कर्मचारी नियमित रूप से सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कर्मचारी बन गए।

नियमितीकरण के बाद कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में कार्य किया और 31 मार्च 2009 तक नियमित वेतन (8,209 रुपये) प्राप्त किया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के वेतन वापस ले लिया और अप्रैल 2009 से उन्हें कलेक्टर दर पर भुगतान शुरू कर दिया गया।

हाईकोर्ट से शुरू हुई कानूनी लड़ाई

विश्वविद्यालय के इस निर्णय से परेशान होकर कर्मचारियों ने डॉ. अरुण सिंगरौल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिकाएं दायर कीं। इसी दौरान विश्वविद्यालय ने 19 फरवरी 2010 के आदेश से कर्मचारियों के नियमितीकरण को पूर्व प्रभाव से निरस्त कर दिया, जिसे भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 6 मार्च 2023 को अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि 19 फरवरी 2010 का आदेश विधिसंगत नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी याचिकाकर्ता एक्ट 2009 की धारा 4(डी) के अंतर्गत नियमित कर्मचारी माने जाएंगे और उन्हें 26 अगस्त 2008 के आदेश के अनुसार सभी सेवा लाभ दिए जाएंगे।

डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट से भी यूनिवर्सिटी को झटका

सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रिट अपील दायर (Central University Employees Case) की, जिसे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 21 जून 2023 को खारिज कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में SLP (सिविल) दायर की, जिसे 15 मई 2024 को खारिज कर दिया गया।

इसके बावजूद आदेशों का पालन न होने पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर कुलपति, कुलसचिव और एमएचआरडी सचिव को नोटिस जारी किया गया। इसी बीच विश्वविद्यालय ने रिव्यू और फिर क्यूरेटिव पिटीशन दायर की, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

16 साल की लड़ाई, कई कर्मचारियों को नहीं मिला न्याय

पिछले 16 वर्षों से कर्मचारी नियमितीकरण और वेतन देयकों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। इस लंबे संघर्ष के दौरान कई कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि कुछ बिना नियमितीकरण के ही सेवानिवृत्त हो गए। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश के बाद उम्मीद है कि शेष कर्मचारियों और दिवंगत कर्मचारियों के परिजनों को उनका न्याय और बकाया भुगतान मिल सकेगा।

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