सीजी भास्कर, रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की कमी (Chhattisgarh Cooperative Bank Staff Shortage) से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कभी करीब 1,000 अधिकारी-कर्मचारी वाले सहकारी बैंकों में अब लगभग 400 ही बचे हैं। इसका असर बैंक शाखाओं के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ रहा है। ग्राहकों को केवाईसी, एटीएम कार्ड, कृषि ऋण और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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70 शाखाओं पर बढ़ा कामकाज
प्रदेश में सहकारी बैंकों की कुल 70 शाखाएं हैं। जरूरत के मुताबिक एक शाखा में कम से कम सात कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकांश शाखाएं केवल दो से तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। कर्मचारियों की कमी (Chhattisgarh Cooperative Bank Staff Shortage) के कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ गया है और ग्राहकों के जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
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लोन के लिए करना पड़ रहा इंतजार
स्टाफ की कमी का असर ग्राहकों की रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। नकद जमा करने और निकालने, पासबुक अपडेट कराने, खाते की जानकारी लेने, चेक भुगतान और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जुड़े कामों के लिए ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कृषि ऋण की प्रक्रिया दो से तीन दिनों में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब इसमें एक से डेढ़ सप्ताह तक लग रहा है। बैंकिंग सेवाओं में देरी (Chhattisgarh Cooperative Bank Staff Shortage) से किसानों और दूसरे खाताधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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35 अनुकंपा नियुक्तियां लंबित
सहकारी बैंकों में अनुकंपा नियुक्ति के 35 मामले लंबे समय से लंबित बताए गए हैं। वहीं, कई वर्षों से नई भर्तियां भी नहीं हुई हैं। इससे कर्मचारियों की कमी की समस्या और गंभीर हो गई है। लंबित नियुक्तियों (Chhattisgarh Cooperative Bank Staff Shortage) को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बनी हुई है और वे अपनी मांगें उठा रहे हैं।
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धान खरीदी में बढ़ेगा दबाव
नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी अभियान के दौरान सहकारी समितियों और बैंकों के बीच समन्वय की जरूरत बढ़ जाएगी। किसानों के भुगतान, बैंक खातों में राशि जमा करने, ऋण वसूली और खरीफ सीजन से जुड़े लेन-देन जैसे कामों को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।
ऐसे में कर्मचारियों की मौजूदा कमी (Chhattisgarh Cooperative Bank Staff Shortage) के कारण बैंकिंग कामकाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना बैंकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।



