सीजी भास्कर, 12 अक्टूबर। पाकिस्तान में आतंकवाद और राजनीतिक विरोध के बीच हालात तनावपूर्ण (Pakistan Crisis) होते जा रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने और सेना तैनात करने का फैसला लिया गया है। वहीं, कराची में 20 अक्टूबर तक रैलियों, धरनों और सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन फैसलों के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।

खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन Pakistan Crisis
11 अक्टूबर को संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। इसके तहत प्रांतीय सरकार के अधिकार गवर्नर को सौंपने और 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद बनाने की घोषणा की गई है। 12 जिलों के प्रशासनिक कामकाज के लिए अलग सचिवालय बनाने की भी योजना है।
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आतंकवाद से निपटने के लिए सेना तैनात
अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा में लंबे समय से आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं। पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद पर काबू पाने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने गवर्नर शासन के फैसले का विरोध किया है।
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तैनाती का आदेश जारी किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में प्रांत में करीब 6,200 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई। उन्होंने पुलिस बल में करीब 17 हजार पद खाली होने का भी दावा किया।
कराची में 20 अक्टूबर तक प्रदर्शन पर रोक
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कराची प्रशासन ने 11 से 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू (Pakistan Crisis) की है। इसके तहत पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने, रैली निकालने और धरना प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई है।
प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनों से यातायात प्रभावित हो रहा था और आम लोगों को अस्पतालों तक पहुंचने में परेशानी हो रही थी। इसी आधार पर सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इमरान खान की रिहाई को लेकर विरोध
इमरान खान की रिहाई और संविधान के पालन की मांग को लेकर पीटीआई समर्थक विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। पार्टी सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई करने के आरोप लगाती रही है। ऐसे में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध से सरकार और विपक्ष के बीच विवाद और बढ़ सकता है।
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सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान सरकार के सामने आतंकवाद पर नियंत्रण पाने के साथ राजनीतिक विरोध से निपटने की चुनौती भी है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती और कराची में प्रदर्शनों पर रोक का असर आने वाले दिनों में साफ होगा।
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