सीजी भास्कर, 12 अक्टूबर। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर (Supreme Court Hearing) हो रहे विरोध प्रदर्शन अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं। प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हिरासत में लेने और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को लेकर अदालत में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।
मामले को लेकर अदालत में वकीलों ने अपनी परेशानी रखी। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो सकते हैं, लेकिन अदालत के कामकाज में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए।

वकीलों की हिरासत पर उठे सवाल Supreme Court Hearing
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत को बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया।
प्रदर्शन के अधिकार पर क्या बोला कोर्ट?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ वकीलों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि धारा 163 के आदेश की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ वकीलों को बसों में बैठाकर हिरासत में लिया गया।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने (Supreme Court Hearing) का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के कारण सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए। अदालत के कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही भी बाधित नहीं होनी चाहिए।
13 अक्टूबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की हिरासत, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और प्रदर्शन के दौरान कथित अव्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के लिए मंगलवार, 13 अक्टूबर की तारीख (Supreme Court Hearing) तय की है। अब इस मामले में अदालत के फैसले और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
खबरें और भी पढ़ें…Teachers Online Attendance Missing : छत्तीसगढ़ में 7 हजार से ज्यादा शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी गायब, वेतन रोकने की तैयारी



