सीजी भास्कर, 09 सितंबर। सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन को लेकर धमतरी (Forest Resources Conservation) जिले के मारागांव, मड़ेली, मोहेरा, हिर्रीडीह और सातबाहना की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने मंगलवार को कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। समितियों ने ग्राम सभा द्वारा तैयार सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना के परीक्षण, अनुमोदन और प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है।
- वन अधिकार अधिनियम के तहत तैयार की गई कार्ययोजना Forest Resources Conservation
- जिला स्तर पर परीक्षण और अनुमोदन की मांग
- सामुदायिक भागीदारी से होगा वन संसाधनों का संरक्षण
- सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने की भी मांग
- पेसा और पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों का दिया हवाला
- ज्ञापन सौंपने में ये लोग रहे शामिल
ग्रामीणों और समिति पदाधिकारियों ने कार्ययोजना को जिला स्तरीय प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग रखी।

वन अधिकार अधिनियम के तहत तैयार की गई कार्ययोजना Forest Resources Conservation
ज्ञापन में बताया गया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम सभा और अधिकारधारकों को सामुदायिक वन संसाधनों की रक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन का अधिकार एवं दायित्व दिया गया है।
इसी प्रावधान के तहत स्थानीय आवश्यकताओं, वन संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका संवर्धन को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।
जिला स्तर पर परीक्षण और अनुमोदन की मांग
सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों ने मांग की है कि ग्राम सभा द्वारा तैयार कार्ययोजना का जिला स्तर पर आवश्यक परीक्षण किया जाए। इसके बाद कार्ययोजना को अनुमोदित कर आगामी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समितियों का कहना है कि प्रस्तावित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न संबंधित विभागों के बीच समन्वय और आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
सामुदायिक भागीदारी से होगा वन संसाधनों का संरक्षण
ग्रामीणों ने कहा कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ही वन संसाधनों का बेहतर संरक्षण, संवर्धन और सतत प्रबंधन संभव है।
कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर वन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए और स्थायी अवसर विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
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सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने की भी मांग
संयुक्त ज्ञापन में पारा सातबाहना को पृथक ग्राम के रूप में मान्यता देने और स्वतंत्र ग्राम सभा गठित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
ग्रामीणों ने बताया कि सातबाहना एक अलग और पारंपरिक बस्ती है, जहां समुदाय लंबे समय से निवास करता आ रहा है तथा अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों का संचालन करता है।
पेसा और पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों का दिया हवाला
ग्रामीणों ने अपनी मांग के समर्थन में पेसा अधिनियम, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख किया।
उन्होंने प्रशासन से सातबाहना की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, पारंपरिक निवास, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की सामूहिक इच्छा का परीक्षण करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार करते हुए सातबाहना को स्वतंत्र ग्राम के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
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ज्ञापन सौंपने में ये लोग रहे शामिल
कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज साक्षी, प्रमोद कुंजाम, मोहनलाल, राकेश, हीरालाल नेताम, महेंद्र, हेमेंद्र, भुनेश्वरी कश्यप, दुलारी, गेवेंद्र, धनराज और बलीराम सहित अन्य ग्रामीण एवं सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के पदाधिकारी शामिल रहे।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना के अनुमोदन और सातबाहना को पृथक ग्राम का दर्जा देने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करेगा।
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रिपोर्टर : रिजवान मेमन



