सीजी भास्कर, 19 सितंबर : छत्तीसगढ़ में सरकारी बिजली कनेक्शनों को स्मार्ट मीटर (Government Department Smart Meter) से जोड़ने के बाद भी भुगतान व्यवस्था में बड़ा पेंच सामने आया है। प्रदेश में 32,741 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड सिस्टम में बदला गया है। करीब 85 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन विभागों की ओर से पर्याप्त अग्रिम राशि जमा नहीं की जा रही है।
- 32,741 सरकारी कनेक्शन प्री-पेड सिस्टम में
- सरकारी कनेक्शनों के लिए बनाए गए अलग-अलग ग्रुप
- कुछ विभागों ने ही शुरू किया अग्रिम भुगतान
- 45 सरकारी विभागों पर करीब 3 हजार करोड़ का बकाया
- आरडीएसएस योजना से जुड़ा है केंद्रीय फंड
- चार किश्तों में बकाया चुकाने की योजना
- 32 हजार से ज्यादा कनेक्शन, भुगतान सिर्फ 2 करोड़ तक
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Guest Teacher Honorarium 2026 : 1535 अतिथि शिक्षकों के 6 महीने के मानदेय के लिए 18.42 करोड़ जारी
सरकारी बिजली कनेक्शनों की प्री-पेड व्यवस्था (Government Department Smart Meter) लागू होने के बावजूद अब तक बिजली कंपनी को केवल डेढ़ से दो करोड़ रुपए का प्री-पेमेंट मिला है। इसका असर केंद्र से मिलने वाली राशि पर भी पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार सरकारी कनेक्शनों से जुड़े भुगतान और पुराने बकाए के निपटारे में देरी के कारण राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की एक-तिहाई राशि अटक गई है।
यह भी पढ़ें : Bagbahara Fire : बागबाहरा में टायर दुकान से उठने लगा धुआं, आग की लपटों ने बढ़ाई लोगों की चिंता
32,741 सरकारी कनेक्शन प्री-पेड सिस्टम में
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार एक अगस्त से विकासखंड स्तर तक के सरकारी विभागों के स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था लागू की गई है। प्रदेश में कुल 32,741 सरकारी बिजली कनेक्शनों को इसके लिए चिह्नित किया गया है।
प्री-पेड सिस्टम में सरकारी कार्यालयों को बिजली की खपत से पहले निर्धारित राशि जमा करनी होती है। उपलब्ध बैलेंस के आधार पर बिजली की आपूर्ति होती है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों पर बढ़ते बिजली बकाए को नियंत्रित करना और बिजली कंपनी की भुगतान व्यवस्था को व्यवस्थित करना है।
यह भी पढ़ें : Bhilai Worker Death : पुरानी भिलाई में काम के दौरान भारी लोहे की चपेट में आने से मजदूर की मौत
सरकारी कनेक्शनों के लिए बनाए गए अलग-अलग ग्रुप
प्री-पेड व्यवस्था को लागू करने के लिए बिजली कंपनी ने सरकारी कनेक्शनों के अलग-अलग ग्रुप बनाए हैं। प्रत्येक ग्रुप की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी संबंधित विभागों से प्री-पेमेंट कराने और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी करने की है।
हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक व्यवस्था लागू होने के बावजूद सरकारी स्मार्ट मीटर में प्री-पेमेंट (Government Department Smart Meter) के रूप में अब तक केवल करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए हैं। कनेक्शनों की संख्या और सरकारी कार्यालयों की बिजली खपत के मुकाबले यह राशि काफी कम बताई जा रही है।
कुछ विभागों ने ही शुरू किया अग्रिम भुगतान
बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार अभी कुछ विभागों और जिलों से ही प्री-पेमेंट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इनमें आरटीओ, क्रेडा, बलौदाबाजार का पशु चिकित्सा विभाग, जिला पंचायत बलौदाबाजार, कबीरधाम, दुर्ग और मानव अधिकार आयोग के कार्यालय शामिल हैं।
इसके उलट नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे बड़े विभागों में बिजली की खपत अधिक है। इनके सरकारी कनेक्शनों की संख्या भी काफी है। अधिकारियों के अनुसार इन विभागों की ओर से प्री-पेमेंट करने में लगातार देरी हो रही है।
यह भी पढ़ें : Balod Bus Accident : करहीभदर मोड़ पर मौत का सफर, यात्रियों से भरी बस पलटी, कंडक्टर की मौत, 25 से ज्यादा घायल
45 सरकारी विभागों पर करीब 3 हजार करोड़ का बकाया
सरकारी विभागों के सामने केवल नए प्री-पेड सिस्टम में राशि जमा करने की चुनौती नहीं है। पुराने बिजली बिल का बकाया भी बड़ी समस्या है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के करीब 45 सरकारी विभागों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है।
प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद भी पुराने बकाए का भुगतान नहीं होने पर बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि केंद्र की योजना के तहत पुराने बकाए के निपटारे पर भी जोर दिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें : Fake Branded Tea Case : बिलासपुर में ब्रांडेड चाय के नाम पर संदिग्ध माल पकड़ा, 23 पैकेट जब्त कर जांच के लिए भेजे
आरडीएसएस योजना से जुड़ा है केंद्रीय फंड
सरकारी बिजली कनेक्शनों में प्री-पेड व्यवस्था और पुराने बकाए का मामला केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम यानी आरडीएसएस से जुड़ा हुआ है। इस योजना का उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिति में सुधार करना है।
योजना के तहत अगली किस्त का भुगतान सरकारी स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था के क्रियान्वयन और बकाया राशि के निपटारे जैसी शर्तों से जुड़ा है। ऐसे में सरकारी विभागों की ओर से भुगतान में देरी का असर आरडीएसएस से मिलने वाली केंद्रीय राशि (Government Department Smart Meter) पर पड़ रहा है।
चार किश्तों में बकाया चुकाने की योजना
सरकारी विभागों के पुराने बिजली बकाए के भुगतान के लिए चार किश्तों में राशि चुकाने का प्रावधान किया गया था। इसके तहत जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027 की अवधि निर्धारित की गई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विभागों पर एक साथ बड़ी राशि जमा करने का दबाव डालने के बजाय पुराने बकाए का चरणबद्ध तरीके से निपटारा करना है। लेकिन अधिकारियों के अनुसार कई विभागों की ओर से बकाया भुगतान और प्री-पेड मीटर में पर्याप्त राशि जमा करने को लेकर अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Aashirwad Ke Diye : 1.50 करोड़ से ज्यादा दीयों से जगमगाया छत्तीसगढ़, गांव से शहर तक दिखी जनभागीदारी
32 हजार से ज्यादा कनेक्शन, भुगतान सिर्फ 2 करोड़ तक
प्रदेश में 32,741 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड व्यवस्था में लाया गया है। करीब 85 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर भी लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक प्री-पेमेंट के रूप में केवल डेढ़ से दो करोड़ रुपए मिलना भुगतान व्यवस्था की धीमी रफ्तार को उजागर करता है। अब सबसे बड़ी चुनौती पुराने बकाए को कम करने के साथ सरकारी विभागों के स्मार्ट मीटर भुगतान (Government Department Smart Meter) को नियमित करना है। विभागों की ओर से समय पर अग्रिम राशि जमा नहीं होने और पुराने बिलों का निपटारा नहीं होने की स्थिति में आरडीएसएस से जुड़ी केंद्रीय राशि पर असर बना रह सकता है।
यह भी पढ़ें : PM Modi Birthday : इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मोदी को किया बर्थडे विश, एक्स पर पोस्ट में बताया…



