सीजी भास्कर, 19 सितंबर : समग्र शिक्षा में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने वेतन भुगतान (Samagra Shiksha Salary Delay) को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
वेतन भुगतान में देरी (Samagra Shiksha Salary Delay) का असर अब नौकरी पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि कुछ कर्मचारी इस्तीफा देने के लिए विभागीय स्तर पर संपर्क कर रहे हैं। रायपुर में ही 100 से ज्यादा कर्मचारियों के तीन महीने से वेतन अटके होने की जानकारी सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि किराया, घर का खर्च और अन्य जरूरी भुगतान करना मुश्किल हो गया है।
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तीन महीने से सैलरी का इंतजार
समग्र शिक्षा में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार उन्हें लगातार तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इनमें संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी शामिल हैं। मासिक वेतन पर निर्भर कर्मचारियों के लिए लंबे समय तक भुगतान नहीं होना बड़ी परेशानी बन गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि तीन महीने से वेतन अटका (Samagra Shiksha Salary Delay) होने के कारण कई लोगों को उधार लेकर रोजमर्रा का खर्च चलाना पड़ रहा है। लगातार भुगतान की अनिश्चितता के चलते कुछ कर्मचारी अब नौकरी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
सिंगल नोडल एजेंसी स्पर्श से अटकी प्रक्रिया
कर्मचारियों की सैलरी का भुगतान सिंगल नोडल एजेंसी स्पर्श के माध्यम से किया जाना है। कर्मचारियों के अनुसार पहले नोटशीट के आधार पर भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो जाती थी। अब नई व्यवस्था में अतिरिक्त प्रक्रियाएं जोड़ी गई हैं।
नई व्यवस्था के तहत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाना है। इसमें भुगतान का अनुपात 60 और 40 बताया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि इसी प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हो रही है।
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अधिकारियों ने जल्द भुगतान का दिया भरोसा
अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। उनका कहना है कि वेतन भुगतान जल्द शुरू होगा और आगे नियमित भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, कर्मचारियों के लिए तत्काल राहत जरूरी है। सैलरी भुगतान की प्रक्रिया (Samagra Shiksha Salary Delay) पूरी होने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि तीन महीने का लंबा अंतराल उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाल रहा है।
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वेतन नहीं मिलने से बढ़ा आर्थिक संकट
कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी करने के बावजूद तीन महीने तक वेतन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, बच्चों की पढ़ाई, राशन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए उन्हें उधार लेना पड़ रहा है।
कुछ कर्मचारियों ने आर्थिक दबाव के चलते इस्तीफा देने का रास्ता चुना है। कर्मचारियों के मुताबिक यदि जल्द बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो और कर्मचारी भी नौकरी छोड़ने का फैसला कर सकते हैं।
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कार्यालयों के कामकाज पर भी असर
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों के अनुसार समग्र शिक्षा की ओर से बजट जारी नहीं होने के कारण केवल कर्मचारियों के वेतन का मामला ही प्रभावित नहीं हुआ है। कार्यालयों के नियमित संचालन में भी परेशानियां सामने आ रही हैं।
कई काम और भुगतान संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में समग्र शिक्षा में भुगतान संकट (Samagra Shiksha Salary Delay) अब कर्मचारियों के साथ-साथ कार्यालयीन कामकाज के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
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इस्तीफों ने बढ़ाई चिंता
तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के बीच कर्मचारियों के इस्तीफे सामने आने से विभागीय व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नियमित आय ही उनकी आर्थिक सुरक्षा का प्रमुख आधार है।
अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि लंबित वेतन का भुगतान कब तक होता है। वेतन संकट का समाधान (Samagra Shiksha Salary Delay) होने के साथ ही इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों और कार्यालयीन कामकाज की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
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