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Fire Brigade Purchase : 124 करोड़ की खरीदी टेंडर के बाद भी अटकी, गृह-वित्त सचिव से मांगा जवाब

By Newsdesk Admin
21/08/2026
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Fire Brigade Purchase : 124 करोड़ की खरीदी टेंडर के बाद भी अटकी, गृह-वित्त सचिव से मांगा जवाब
Fire Brigade Purchase : 124 करोड़ की खरीदी टेंडर के बाद भी अटकी, गृह-वित्त सचिव से मांगा जवाब

सीजी भास्कर, 21 अगस्त : छत्तीसगढ़ में दमकल वाहनों और आधुनिक फायर उपकरणों (Fire Brigade Purchase) की खरीदी में हो रही देरी पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। करीब 124 करोड़ रुपए की लागत से होने वाली खरीदी की प्रक्रिया टेंडर पूरा होने के बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन से इस देरी पर जवाब मांगा है।

Contents
  • गृह और वित्त सचिव को देना होगा व्यक्तिगत शपथपत्र
  • टेंडर पूरा, फिर भी कंपनी से एग्रीमेंट नहीं
  • दो महीने में पांच रिमाइंडर, फिर भी फाइल अटकी
  • बिलासपुर का फायर सिस्टम प्रोजेक्ट भी अधूरा
  • छह महीने में पूरा होना था काम, अब तक सिर्फ पिलर
  • 31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

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गृह और वित्त सचिव को देना होगा व्यक्तिगत शपथपत्र

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने गृह सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि टेंडर प्रक्रिया (Fire Brigade Purchase) पूरी होने के बावजूद खरीदी की प्रक्रिया अब तक क्यों अटकी हुई है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।

 

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टेंडर पूरा, फिर भी कंपनी से एग्रीमेंट नहीं

दमकल वाहनों, आधुनिक फायर उपकरणों (Fire Brigade Purchase) और पर्याप्त स्टाफ की कमी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। पिछली सुनवाई में जून में राज्य शासन ने बताया था कि 124 करोड़ रुपए के फायर उपकरण और वाहनों की खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

हालांकि बुधवार की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि टेंडर पूरा होने के बावजूद सबसे कम दर वाली कंपनी के साथ अब तक एग्रीमेंट नहीं हुआ है। टेंडर की समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है।

 

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दो महीने में पांच रिमाइंडर, फिर भी फाइल अटकी

बताया गया कि टेंडर (Fire Brigade Purchase) की अवधि बढ़ाने की फाइल गृह और वित्त विभाग में लंबित है। डीजीपी की ओर से जून में ही समय-सीमा बढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

न्याय मित्र सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि पिछले दो महीनों में प्रशासन को पांच रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। इन रिमाइंडर में हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति नहीं मिल सकी।

 

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बिलासपुर का फायर सिस्टम प्रोजेक्ट भी अधूरा

सुनवाई के दौरान बिलासपुर में फायर सिस्टम प्रोजेक्ट की स्थिति भी सामने आई। इस परियोजना को वर्ष 2020 में प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, लेकिन जमीन तय करने में करीब चार साल लग गए। पहले सर्किट हाउस के पास जमीन तय की गई थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।

इसके बाद शहर के बाहरी क्षेत्र में जमीन की तलाश की गई और कुदुदंड पानी टंकी के पास खाली जमीन को परियोजना के लिए चुना गया।

 

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छह महीने में पूरा होना था काम, अब तक सिर्फ पिलर

परियोजना का निर्माण ठेकेदार को सौंपते हुए छह महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। अगस्त तक निर्माण पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक मौके पर केवल पिलर ही खड़े हो सके हैं।

निर्माण की धीमी गति को लेकर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और ठेकेदार की लेटलतीफी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में एक तरफ 124 करोड़ की दमकल गाड़ियों और उपकरणों की खरीदी अनुमति के इंतजार में अटकी है, तो दूसरी ओर बिलासपुर का फायर सिस्टम प्रोजेक्ट भी वर्षों बाद अधूरा पड़ा है।

 

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31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने गृह और वित्त विभाग के सचिवों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। 31 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में शासन के जवाब और शपथपत्र के आधार पर कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।

 

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