सीजी भास्कर, 07 सितंबर। कोरबा जिले में डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान न्यास) की राशि से कराए (Sub Engineer Suspension) जा रहे निर्माण कार्यों में अनियमितता सामने आई है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर कुणाल दुदावत को आंगनबाड़ी, स्कूल और पीडीएस भवनों के निर्माण में कई गंभीर खामियां मिलीं। सबसे बड़ी लापरवाही जेंजरा में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन में सामने आई, जहां 8 एमएम की जगह 6 एमएम सरिया इस्तेमाल किया जा रहा था।
- आंगनबाड़ी भवन में 8 MM की जगह मिला 6 MM सरिया Sub Engineer Suspension
- स्कूल भवन की टाइल्स में भी मिली गुणवत्ता संबंधी खामी
- पीडीएस भवन की नींव जमीन के स्तर से नीचे मिली
- अक्टूबर तक पूरा करना होगा स्कूल भवन
- लंबित फाइलों और उपयोगिता प्रमाण पत्रों पर भी कलेक्टर की सख्ती
- जेंजरा के उपयोगिता प्रमाण पत्र में देरी पर वेतन रोकने के निर्देश
- खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए है DMF की राशि
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सब-इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंचनामा तैयार कराने, एफआईआर दर्ज करने और सब-इंजीनियर को निलंबित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं।

आंगनबाड़ी भवन में 8 MM की जगह मिला 6 MM सरिया Sub Engineer Suspension
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जनपद पंचायत कटघोरा अंतर्गत ग्राम जेंजरा में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन के स्लैब में इस्तेमाल किए गए सरिए की गुणवत्ता और मोटाई को लेकर उन्हें संदेह हुआ।
कलेक्टर ने मौके पर ही सीढ़ी मंगवाई और सब-इंजीनियर रामकुमार पोर्ते की मौजूदगी में सरिए की जांच कराई। जांच के दौरान कई स्थानों पर तय मानक के अनुसार 8 एमएम की जगह 6 एमएम सरिया लगा हुआ मिला।
इस गंभीर अनियमितता पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने मामले का पंचनामा तैयार कराने, संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सब-इंजीनियर रामकुमार पोर्ते को निलंबित करने की कार्रवाई के निर्देश दिए।
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स्कूल भवन की टाइल्स में भी मिली गुणवत्ता संबंधी खामी
निरीक्षण के दौरान ग्राम जेंजरा में निर्माणाधीन स्कूल भवन की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में मिली। भवन के फर्श पर लगाई जा रही टाइल्स निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं।
कलेक्टर ने निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों को तत्काल गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही अधिकारियों को निर्माण सामग्री की नियमित जांच करने और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
पीडीएस भवन की नींव जमीन के स्तर से नीचे मिली
कलेक्टर ने ग्राम सलोरा में निर्माणाधीन पीडीएस भवन का भी निरीक्षण किया। यहां भवन की नींव जमीन के सामान्य स्तर से काफी नीचे पाई गई।
निर्माण कार्य में इस तरह की खामी को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को मामले की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए। जांच के बाद आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने को भी कहा गया है।
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अक्टूबर तक पूरा करना होगा स्कूल भवन
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कटघोरा का भी निरीक्षण किया। यहां आदिवासी विकास विभाग की ओर से नए स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा है।
निर्माण कार्य की धीमी गति पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को अक्टूबर तक भवन निर्माण का काम हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा का पालन भी जरूरी है। अनावश्यक देरी होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
लंबित फाइलों और उपयोगिता प्रमाण पत्रों पर भी कलेक्टर की सख्ती
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जनपद पंचायत कार्यालय में लंबित फाइलों और उपयोगिता प्रमाण पत्रों की भी समीक्षा की। उन्होंने पाया कि पूरे हो चुके कई कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र अनावश्यक रूप से लंबित रखे जा रहे हैं।
कलेक्टर ने कहा कि उपयोगिता प्रमाण पत्रों में देरी से भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है और विकास कार्यों की गति भी धीमी पड़ती है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने जनपद सीईओ को कर्मचारियों के कामकाज की जांच करने और बिना कारण फाइल रोकने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जेंजरा के उपयोगिता प्रमाण पत्र में देरी पर वेतन रोकने के निर्देश
जेंजरा क्षेत्र के उपयोगिता प्रमाण पत्र को लंबे समय तक लंबित रखने के मामले को भी कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार बाबू का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को समय पर पूरा करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
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खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए है DMF की राशि
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि डीएमएफ की राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जाती है।
ऐसे में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी राशि के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद जिले में डीएमएफ मद से चल रहे अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ने की संभावना है।



