सीजी भास्कर, 19 अगस्त। बिलासपुर रेंज में बढ़ते Cyber Crime पर अब पुलिस ने कार्रवाई तेज करने की तैयारी कर ली है। आईजी राम गोपाल गर्ग ने मंगलवार को रेंज के साइबर थानों और साइबर सेल की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर लंबित शिकायतों और अपराधों के जल्द निराकरण के निर्देश दिए। बैठक में फर्जी सिम बेचने वाले पीओएस एजेंटों से लेकर ठगी की रकम वापस कराने तक कई अहम फैसले लिए गए।
आईजी ने साफ कहा कि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेंज के सामान्य थानों को भी रोजाना साइबर पोर्टल पर लॉगिन कर उसी दिन प्राप्त शिकायतों को स्वीकार करने और तत्काल वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी सिम बेचने वालों पर होगी एफआईआर Cyber Crime
समीक्षा बैठक में फर्जी या संदिग्ध सिम एक्टिवेट करने वाले पीओएस एजेंटों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ऐसे एजेंटों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई करने को कहा गया है।
इसके अलावा पुलिस मुख्यालय से मिले म्यूल अकाउंट्स की सूची के आधार पर भी तत्काल कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए। सूची में बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा और जांजगीर समेत अन्य क्षेत्रों से जुड़े खाते शामिल हैं।
हर थाने में रोजाना साइबर पोर्टल लॉगिन जरूरी
आईजी ने निर्देश दिया कि सिर्फ साइबर थाने ही नहीं, बल्कि रेंज के सभी सामान्य थानों को भी नेशनल साइबर अपराध पोर्टल पर रोजाना लॉगिन करना होगा।
पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों को उसी दिन स्वीकार कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू करनी होगी। लंबित मामलों का बिना देरी के निराकरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
ठगी की रकम पीड़ितों को जल्द लौटाने के निर्देश
साइबर ठगी के मामलों में बैंकों द्वारा होल्ड की गई राशि को पीड़ितों के खातों में वापस कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
धारा 106 और कोर्ट ऑर्डर की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ 15 दिन से अधिक पुराने बैंक होल्ड मामलों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। आईजी ने स्पष्ट किया कि बैंक से समन्वय के दौरान पुलिस स्तर पर कोई रिक्वेस्ट अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहनी चाहिए।
मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट होंगे ब्लॉक
साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम अकाउंट को प्राथमिकता के आधार पर ब्लॉक कराने के निर्देश दिए गए।
इन कार्रवाइयों की मासिक प्रगति रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजी जाएगी। इससे साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल संसाधनों पर समय रहते रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।
समन्वय पोर्टल पर अपलोड होगा अपराधियों का पूरा डेटा
गिरफ्तार साइबर अपराधियों का पूरा विवरण, फिंगरप्रिंट और एफआईआर की स्थिति समन्वय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
साइबर वालंटियर्स के सत्यापन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय युवाओं को साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
आईजी ने दिए ये प्रमुख निर्देश
बैठक में सभी थानों का साइबर पोर्टल पर शत-प्रतिशत नियमित लॉगिन सुनिश्चित करने, लंबित मामलों का तेजी से निराकरण करने और 15 दिन से पुराने बैंक होल्ड मामलों पर तत्काल कार्रवाई करने कहा गया।
इसके साथ ही कोर्ट आदेश के जरिए पीड़ितों की राशि वापस कराने, फर्जी सिम बेचने वाले पीओएस एजेंटों पर एफआईआर और गिरफ्तारी, ठगी में इस्तेमाल डिजिटल माध्यमों की ब्लॉकिंग और समन्वय पोर्टल पर अपराधियों का डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
आधुनिक तकनीक से साइबर अपराध पर नियंत्रण
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि बैठक का उद्देश्य बढ़ते साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के साथ पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को आधुनिक तकनीकी पुलिसिंग को प्राथमिकता देने और निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने की हिदायत दी।
उन्होंने कहा कि साइबर मामलों का समय पर निराकरण होने से आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
बैठक में आईजी कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे, उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा, रेंज साइबर थाना प्रभारी सहित साइबर थाने और साइबर सेल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।




