सीजी भास्कर, 23 अगस्त : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले (IGKV Paper Leak Case) में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। दुर्ग के भारती कॉलेज के असिस्टेंट लेक्चरर समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रबंधन ने भी कार्रवाई की है। प्राचार्य डॉ. एके दुबे और कथित मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
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परीक्षा से एक दिन पहले पहुंच जाता था पेपर
मामले में कुछ छात्रों ने प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर गंभीर दावे किए हैं। छात्रों के मुताबिक, पेपर परीक्षा से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच जाता था। दावा है कि प्रश्नपत्र PDF के रूप में WhatsApp के जरिए शेयर किए जाते थे और एक पेपर के लिए 1 हजार से 5 हजार रुपये तक लिए जाते थे।
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मिलकर जुटाते थे पैसे, फिर WhatsApp पर शेयर होती थी PDF
कुछ छात्रों का कहना है कि कई छात्र मिलकर प्रश्नपत्र खरीदने के लिए पैसे जुटाते थे। रकम पूरी होने के बाद PDF को WhatsApp पर आगे शेयर कर दिया जाता था। छात्रों ने यह भी दावा किया कि मामला सिर्फ एक विषय तक सीमित नहीं था, बल्कि सेमेस्टर के कई विषयों के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध हो जाते थे। हालांकि, छात्रों की ओर से किए गए इन दावों की पुलिस जांच में पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
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प्रश्नपत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्राचार्य पर
कॉलेज प्रबंधन ने प्रश्नपत्र की सुरक्षा में लापरवाही को भी गंभीरता से लिया है। कॉलेज डायरेक्टर के मुताबिक, विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र आने के बाद उसे सुरक्षित रखना प्राचार्य की जिम्मेदारी थी। वहीं योगेश सोनकेसरिया को करीब एक साल से प्रश्नपत्र लाने और जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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कितने विषयों के पेपर लीक हुए, जांच जारी
पेपर लीक मामले में अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितने विषयों के प्रश्नपत्र लीक हुए और इस नेटवर्क से कितने छात्र जुड़े थे। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही छात्रों के दावों और पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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छात्रों के दावों की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले (IGKV Paper Leak Case) में पुलिस की जांच जारी है। फिलहाल छात्रों द्वारा WhatsApp पर PDF मिलने और पैसे लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र कितने समय पहले लीक हुए और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे।
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