सीजी भास्कर, 22 अगस्त : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा का प्रश्नपत्र (IGKV Exam Paper Leak) सोशल मीडिया पर पहले ही प्रसारित होने के मामले ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा से जुड़े इस मामले को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाओं की शुचिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
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परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर पहुंचा प्रश्नपत्र
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी यानी कीट विज्ञान विषय की परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने की शिकायत सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त कर दी है।
इस मामले की जांच प्रश्नपत्र वायरल (IGKV Exam Paper Leak) होने की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से बाहर आया और इसे सोशल मीडिया तक किस तरह पहुंचाया गया।

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पांच सदस्यीय जांच समिति गठित, FIR दर्ज
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इसके साथ ही तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
पुलिस की जांच में साइबर सेल की भी मदद ली जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर प्रश्नपत्र के प्रसारण की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी। समिति सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में इस्तेमाल किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान भी करेगी।
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करीब 1,200 विद्यार्थी परीक्षा में हुए थे शामिल
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस परीक्षा में प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थी शामिल होने वाले थे। प्रश्नपत्र के परीक्षा से पहले प्रसारित होने की शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया। निरस्त की गई परीक्षा अब सितंबर के प्रथम सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी। इससे परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।
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कहां से बाहर आया पेपर, जांच में सामने आएगा पूरा सच
जांच समिति यह पता लगाएगी कि परीक्षा प्रश्नपत्र वायरल (IGKV Exam Paper Leak) होने की शुरुआत किस स्रोत से हुई। इसके बाद प्रश्नपत्र किन लोगों या माध्यमों तक पहुंचा और सोशल मीडिया पर इसे किसने प्रसारित किया, इसकी भी जांच की जाएगी। पुलिस और साइबर सेल उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के साथ अन्य तथ्यों की भी जांच करेंगे। सरकार ने जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।
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दोषी कोई भी हो, नहीं बख्शा जाएगा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। विद्यार्थियों की मेहनत, उनका विश्वास और उनका भविष्य सरकार के लिए सर्वोपरि है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया, किसने इसे प्रसारित किया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही, इसकी पूरी जांच होगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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भविष्य की परीक्षाओं की सुरक्षा भी होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों (IGKV Exam Paper Leak) की गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके सुरक्षित रख-रखाव, परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रश्नपत्र वायरल जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकना और विद्यार्थियों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।




