सीजी भास्कर, रायपुर, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में धान की खेती छोड़कर दूसरी फसल उगाने वाले किसानों (Krishak Unnati Yojana) के लिए अहम जानकारी सामने आई है। राज्य में किसानों की आमदनी बढ़ाने और धान की खेती पर निर्भरता कम करने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत निर्धारित दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी व रागी जैसी मिलेट्स फसलों की खेती करने पर किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। सरकार का जोर खेती को बाजार की मांग से जोड़ने और किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक सहायता उपलब्ध कराने पर भी है।
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फसल विविधीकरण पर जोर
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बुधवार को रायपुर संभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अभियान को गति देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती को बाजार की जरूरतों से जोड़ना जरूरी है। अधिकारियों को योजनाबद्ध तरीके से काम करने और फसल विविधीकरण को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया। इस पहल के तहत (Krishak Unnati Yojana) से संबंधित प्रावधानों और दूसरी फसलों की खेती से मिलने वाली सहायता की जानकारी किसानों तक पहुंचाना भी अहम होगा।
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हर जिले में बनेंगे कृषि मॉडल
समीक्षा बैठक में प्रत्येक जिले में दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल विकसित करने पर जोर दिया गया। इन मॉडलों का चयन स्थानीय मिट्टी, जलवायु, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, जिनकी बाजार में मांग हो और जिनसे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सके। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल चुनने से किसानों को खेती की लागत, उत्पादन और बाजार में बिक्री की संभावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
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दलहन, तिलहन और मिलेट्स
प्रदेश में धान के अलावा दूसरी फसलों की खेती बढ़ाने की योजना है। इसके तहत दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी व रागी जैसी मिलेट्स फसलों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। निर्धारित फसलें उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, (Krishak Unnati Yojana) के तहत इस सहायता का लाभ किन किसानों को मिलेगा, कौन-सी फसलें पात्र होंगी और इसके लिए क्या शर्तें लागू रहेंगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित विभागीय दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी। इसलिए किसानों को फसल बदलने से पहले कृषि विभाग से पात्रता और अनुदान की शर्तों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
खेती से बाजार तक सहायता
किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित सहायता देने के बजाय पूरी प्रक्रिया में सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसमें फसल चयन, उत्पादन और विपणन से जुड़े पहलुओं पर काम किया जाएगा। खेती को बाजार की जरूरतों से जोड़ने का उद्देश्य यह है कि किसान ऐसी फसलों का चयन कर सकें, जिनकी मांग हो और जिनसे उन्हें बेहतर आय हासिल करने का अवसर मिले। जिलेवार कृषि मॉडल तैयार करते समय स्थानीय संसाधनों और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सकता है। इससे किसानों को पारंपरिक धान की खेती के अलावा दूसरे विकल्पों पर विचार करने में मदद मिलेगी।
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15 नवंबर से धान खरीदी
समीक्षा बैठक में आगामी 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और मार्कफेड को आपसी समन्वय के साथ काम करने के लिए कहा गया, ताकि खरीदी के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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खाद वितरण पर निगरानी
खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर नजर रखने के लिए साथी पोर्टल का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। इसके माध्यम से खाद की स्थिति की निगरानी और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही, चक्रवात अर्णब के संभावित प्रभावों को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
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किसानों के लिए क्या है अहम
धान के बदले निर्धारित दूसरी फसलें उगाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान का प्रावधान किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। (Krishak Unnati Yojana) से संबंधित सहायता का लाभ लेने की योजना बना रहे किसानों को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी चुनी गई फसल और खेती का क्षेत्र निर्धारित नियमों के दायरे में आता है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया और अनुदान पाने की सभी शर्तों का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसान संबंधित कृषि विभाग या स्थानीय कृषि अधिकारी से जानकारी लेकर ही फसल परिवर्तन का निर्णय लें।



