सीजी भास्कर, 29 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की तैयारी है। गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, सुरक्षा का स्तर चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा है कि सुरक्षा घटाने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। (Leaders Security Reduction Plan)
आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1,550 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 500 से अधिक वाहन तैनात हैं। इन पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अकेले बस्तर में 250 से ज्यादा नेताओं की सुरक्षा में 1,000 से अधिक जवान तैनात बताए गए हैं।
विजय शर्मा बोले- चरणबद्ध तरीके से घटेगी सुरक्षा : Leaders Security Reduction Plan
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद नेताओं की सुरक्षा तुरंत पूरी तरह हटा देना उचित नहीं होता। इसी वजह से छह महीने तक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। अब सुरक्षा श्रेणियों में एक स्तर की कटौती की गई है। आगे भी समीक्षा के बाद चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा कम की जाएगी।

दीपक बैज ने उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि नक्सल खतरा पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है। बस्तर के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अंदरूनी इलाकों में जाना पड़ता है, इसलिए सुरक्षा घटाने से पहले दोबारा आकलन जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के साथ घटना होने पर सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी।
पुलिस बल की तैनाती पर भी चर्चा : Leaders Security Reduction Plan
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पुलिस के स्वीकृत पदों में 20 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। ऐसे में नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती और उस पर होने वाला खर्च भी चर्चा का विषय है। सुरक्षा में बदलाव को लेकर अंतिम आदेश जारी होना बाकी बताया गया है।
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