सीजी भास्कर, 30 अप्रैल : बस्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले माचकोट परिक्षेत्र में वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ विभाग ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण और वनों के विखंडन की कोशिश कर रहे 11 ग्रामीणों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए सभी आरोपित सुकमा जिले के निवासी हैं, जिन्हें न्यायालय में पेशी के बाद न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल जगदलपुर भेज दिया गया है।
पुराने अपराधियों पर विभाग की टेढ़ी नजर
इस माचकोट वन अतिक्रमण कार्रवाई (Machkot Forest Encroachment Action) में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। गिरफ्तार किए गए 11 आरोपितों में से 6 लोग ऐसे हैं जो पहले भी वन अपराधों के सिलसिले में जेल की हवा खा चुके हैं। इन आदतन अपराधियों द्वारा लंबे समय से वन क्षेत्र में अवैध कब्जे की साजिश रची जा रही थी। विभाग ने इनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 जैसी सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक्शन
माचकोट परिक्षेत्र अधिकारी सुमीत साहा के नेतृत्व में चली इस मुहिम में वन अमले और वन प्रबंधन समिति के सुरक्षा श्रमिकों ने अहम भूमिका निभाई। वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शासन के निर्देशानुसार वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ ‘जीरो टालरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। इस माचकोट वन अतिक्रमण कार्रवाई (Machkot Forest Encroachment Action) के जरिए बाहरी जिलों से आकर बस्तर के वनों को नुकसान पहुँचाने वाले गिरोहों को कड़ा संदेश दिया गया है।
सुरक्षा और निगरानी हुई सख्त
उप वन मंडलाधिकारी योगेश कुमार रात्रे ने जानकारी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित गश्त और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग अब न केवल कार्रवाई कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है ताकि ग्रामीण वन संरक्षण के महत्व को समझें। मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी ने मैदानी अमले की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते की गई इस माचकोट वन अतिक्रमण कार्रवाई (Machkot Forest Encroachment Action) से एक बड़े वन क्षेत्र को उजड़ने से बचा लिया गया है।


