सीजी भास्कर, 19 जुलाई : दुर्ग के परमेश्वरी आश्रम में करीब 30 लाख रुपये (Parmeshwari Ashram Case) की कथित वित्तीय अनियमितता और छल-कपट के मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने प्रस्तुत दस्तावेजों और थाना प्रभारी की रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया और पुलिस को अपराध दर्ज कर जांच के निर्देश दिए।
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मामले में लक्ष्मीनारायण देवांगन, पवन कुमार देवांगन और अनिल देवांगन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। यह परिवाद पुरानिक राम देवांगन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
दुर्ग जिले के परमेश्वरी आश्रम से जुड़े इस मामले में शिकायतकर्ता का आरोप है कि आश्रम निर्माण और संचालन के लिए मिली राशि के उपयोग में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। (Durg News)
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Parmeshwari Ashram Case निर्माण के लिए मिली थी करोड़ों की सहायता
परिवाद के अनुसार, वर्ष 2017 में दुर्ग जिला देवांगन समाज के सामाजिक अधिवेशन के बाद परमेश्वरी आश्रम के निर्माण के लिए विभिन्न स्रोतों से आर्थिक सहायता मिली थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 15 लाख रुपये, महापौर निधि से 5 लाख रुपये, सांसद निधि से 6 लाख रुपये और विधायक निधि से 10 लाख रुपये सहित अन्य मदों से राशि स्वीकृत (Financial Irregularities) की गई थी। नगर निगम ने बघेरा स्थित करीब ढाई एकड़ भूमि पर आश्रम का निर्माण कराया और वर्ष 2019 में भवन समाज को सौंप दिया।
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Parmeshwari Ashram Case आय-व्यय का हिसाब नहीं देने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 में गठित संचालन समिति के बाद भवन प्रभारी और अन्य पदाधिकारियों ने समाज की सहमति के बिना आश्रम का संचालन किया। साथ ही आय-व्यय का पूरा विवरण भी समाज के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया शिकायतकर्ता का दावा है कि आश्रम से प्राप्त राशि का हिसाब नहीं दिया गया और धनराशि को अनधिकृत रूप से अपने कब्जे में रखा गया। जब समाज के लोगों ने वित्तीय जानकारी मांगी तो विवाद की स्थिति बन गई।
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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
न्यायालय (Court Order) ने उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध बनना माना। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए गए। पुलिस अब पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों से पूछताछ कर आरोपों की सत्यता की जांच करेगी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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