सीजी भास्कर, 28 अगस्त। रायपुर में 16 वर्षीय नाबालिग से करीब तीन साल तक दुष्कर्म करने और उसके नवजात (Raipur Minor Rape Case) बच्चे को डेढ़ लाख रुपए में बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में नाबालिग के पिता और बुआ समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- तीन साल तक नाबालिग के शोषण का आरोप Raipur Minor Rape Case
- दो बार गर्भवती हुई नाबालिग, पहली बार कराया गया गर्भपात
- छोटी बहनों को भी दुष्कर्म की धमकी देने का आरोप
- फर्जी आधार कार्ड बनाकर नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप
- फर्जी पहचान के आधार पर अस्पताल में कराई गई डिलीवरी
- डिलीवरी के बाद नवजात को डेढ़ लाख रुपए में देने का आरोप
- पिता-बुआ समेत 9 आरोपी गिरफ्तार
- IVF सेंटर और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों की भूमिका की जांच
पुलिस जांच में नाबालिग की उम्र छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उसे बालिग और शादीशुदा दिखाने, अस्पताल में डिलीवरी कराने और नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपने की कथित साजिश का खुलासा हुआ है। मामले की जांच अभी जारी है।

तीन साल तक नाबालिग के शोषण का आरोप Raipur Minor Rape Case
पीड़िता ने 17 अगस्त को अपनी मां और मामा के साथ रायपुर के राजेंद्र नगर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि करीब तीन साल पहले उसके पिता उसे एक कमरे में ले गए थे।
आरोप है कि पिता ने उसे शराब पिलाई और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
पीड़िता के अनुसार, उसने बाद में अपनी बुआ को घटना की जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि बुआ ने उसकी मदद करने के बजाय अपने भाई का साथ दिया।
दो बार गर्भवती हुई नाबालिग, पहली बार कराया गया गर्भपात
पुलिस के अनुसार, इस दौरान नाबालिग दो बार गर्भवती हुई। पहली बार गर्भवती होने पर उसे दवा खिलाकर गर्भपात कराने का आरोप है।
दूसरी बार गर्भपात का समय निकल जाने के बाद उसकी डिलीवरी कराई गई। नाबालिग ने एक बेटे को जन्म दिया।
इसके बाद कथित तौर पर बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंपने की योजना बनाई गई। पुलिस अब इस पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
छोटी बहनों को भी दुष्कर्म की धमकी देने का आरोप
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता करीब पांच साल पहले अलग हो गए थे। इसके बाद पिता उसे बिलासपुर से रायपुर लेकर आ गया था।
उसकी दो छोटी बहनें भी हैं, जिनकी उम्र 9 और 11 साल बताई गई है। आरोप है कि पिता का विरोध करने पर पीड़िता को छोटी बहनों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार करने की धमकी दी जाती थी।
पीड़िता के अनुसार, अपनी बहनों को बचाने और उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के डर से वह लंबे समय तक चुप रही।
फर्जी आधार कार्ड बनाकर नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग की गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद उसके पिता ने एक गार्ड से संपर्क किया। इसके बाद अस्पताल से जुड़े एक व्यक्ति और उसकी पत्नी के माध्यम से दूसरे लोगों तक बात पहुंचाई गई।
जांच के दौरान रायपुर के एक IVF सेंटर में काम करने वाली महिला का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, उसने आगे एक अन्य महिला से संपर्क किया, जिसके जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की कथित व्यवस्था की गई।
आरोप है कि नाबालिग के आधार कार्ड में फोटोशॉप के जरिए जन्मतिथि बदल दी गई। दस्तावेजों में उसे बालिग और शादीशुदा दिखाने की कोशिश की गई।
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फर्जी पहचान के आधार पर अस्पताल में कराई गई डिलीवरी
पुलिस के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाबालिग को डंगनिया स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उसकी डिलीवरी कराई गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अस्पताल में भर्ती के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और उनकी जांच किस स्तर पर की गई।
पुलिस इस मामले में अस्पताल से जुड़े लोगों और दस्तावेज तैयार करने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
डिलीवरी के बाद नवजात को डेढ़ लाख रुपए में देने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, डिलीवरी के बाद नवजात को कुछ दिनों तक एक महिला ने अपने पास रखा। इसके बाद बच्चे को दूसरे लोगों के माध्यम से आगे सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जांच में सामने आया है कि नवजात को करीब डेढ़ लाख रुपए में देने का कथित सौदा तय हुआ था। रकम UPI के जरिए ट्रांसफर किए जाने की बात भी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, डिलीवरी के करीब 20 दिन बाद फर्जी दस्तावेज और लिखापढ़ी के जरिए नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया।
पिता-बुआ समेत 9 आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने नाबालिग से विस्तार से पूछताछ की। पीड़िता की ओर से बताए गए स्थानों और लोगों के आधार पर अलग-अलग जगह जांच की गई।
पुलिस ने जांच के आधार पर नाबालिग के पिता और बुआ समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
रायपुर पश्चिम के डीसीपी रॉबिंसन गुड़िया के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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IVF सेंटर और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों की भूमिका की जांच
पुलिस अब IVF सेंटर में काम करने वाली महिला की भूमिका की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि पूरे मामले में उसकी कितनी और किस स्तर तक भूमिका थी।
इसके साथ ही फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वाले व्यक्ति के बारे में भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने पहले भी किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेजों में इसी तरह की छेड़छाड़ की है या नहीं।
मामले में नवजात को कथित तौर पर बेचने की पूरी कड़ी, पैसों के लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।



