सीजी भास्कर, 28 अगस्त। राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी (Chhattisgarh High Court) करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को शर्तों के साथ राहत दी है। हाईकोर्ट ने प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी को सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने और विवादित सोशल मीडिया पोस्ट व कार्टून हटाने का निर्देश दिया है।
दोनों आरोपियों को अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रमुखता से माफी का पोस्ट करना होगा। साथ ही भविष्य में इस तरह की टिप्पणी दोबारा नहीं करने का शपथपत्र भी हाईकोर्ट के समक्ष देना होगा।

सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और पोस्ट हटाने का निर्देश Chhattisgarh High Court
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा फेसबुक पर भी सार्वजनिक माफीनामा पोस्ट करना होगा।
कोर्ट ने राज्यपाल से संबंधित कथित आपत्तिजनक पोस्ट और कार्टून को सोशल मीडिया से स्थायी रूप से हटाने का आदेश भी दिया है। इन्हीं शर्तों के आधार पर दोनों याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है।
राजभवन की शिकायत पर रायपुर में दर्ज हुई थी FIR
मामले के अनुसार, प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने अपने-अपने फेसबुक अकाउंट से असमिया भाषा में राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी।
आरोप है कि दोनों ने राज्यपाल से संबंधित एक कार्टून भी सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद राजभवन की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत मिलने के बाद रायपुर के सिविल लाइंस थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामला बाद में रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा।
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FIR रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे थे दोनों आरोपी
दोनों आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान 14 अगस्त को उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने पर सहमति जताई।
दोनों ने यह भी कहा कि वे सोशल मीडिया से संबंधित कथित आपत्तिजनक सामग्री हटा देंगे। इसके बाद 19 अगस्त को दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर दोबारा माफी मांगी।
राज्य सरकार की ओर से भी कुछ कड़ी शर्तों के साथ मामले के निपटारे पर सहमति जताई गई।
राज्यपाल के संवैधानिक पद की गरिमा का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राज्यपाल छत्तीसगढ़ के प्रथम नागरिक होने के साथ एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन हैं।
सरकार ने तर्क दिया कि संवैधानिक पद की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियों से विभिन्न वर्गों के बीच तनाव और विवाद की स्थिति बन सकती है।
इसी आधार पर कोर्ट के समक्ष आरोपियों की ओर से सार्वजनिक माफी, विवादित सामग्री हटाने और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की शर्तें रखी गईं।
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भविष्य में ऐसी टिप्पणी नहीं करने का देना होगा शपथपत्र
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ अपने सोशल मीडिया अकाउंट से सभी संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट और कार्टून हटाने होंगे।
इसके अलावा उन्हें शपथपत्र देकर यह भरोसा भी दिलाना होगा कि भविष्य में वे इस तरह की गलती या आपत्तिजनक टिप्पणी दोबारा नहीं करेंगे।
इन शर्तों के पालन के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को मामले में राहत प्रदान की है।
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