सीजी भास्कर, 14 अक्टूबर : बिलासपुर केंद्रीय जेल में बंद श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए सीबीआई को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है। 34 वर्षीय श्रवण की जनवरी 2024 में जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी। अदालत ने पहले मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी और मृतक की पत्नी व बेटियों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था। हिरासत में मौत की जांच (Shravan Suryavanshi Custodial Death) के मामले में अब अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
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सीबीआई को तीन महीने
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को सीलबंद लिफाफे में पेश जांच रिपोर्ट पर विचार किया। इसके बाद जांच पूरी करने के लिए सीबीआई को तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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छह लीटर महुआ शराब
श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को सीपत थाने में दर्ज आबकारी मामले में गिरफ्तार किया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, उनके पास से महुआ शराब की तीन बोतलें जब्त की गई थीं, जिनमें कुल छह लीटर शराब थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा गया।
21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन, 22 जनवरी की सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। गिरफ्तारी और जेल में मौत (Shravan Suryavanshi Custodial Death) से जुड़े घटनाक्रम की जांच अब सीबीआई कर रही है।
पोस्टमार्टम में चोटों का जिक्र
न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों का उल्लेख किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, सिर की चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हृदय और श्वसन तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था।
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अधिकारियों पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए निदेशक को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कराने और जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
पीठ ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। न्यायिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने के स्पष्टीकरण को अदालत ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश बताया था। हिरासत में हिंसा के आरोप (Shravan Suryavanshi Custodial Death) की जांच में जिम्मेदार लोगों की पहचान और कानूनी कार्रवाई अहम होगी।
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परिवार को 25 लाख मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक की पत्नी लहरा बाई तामरे और उनकी बेटियों को चार सप्ताह के भीतर 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया था। अंतिम मुआवजे की राशि का निर्धारण मामले के अंतिम निर्णय के समय किया जाएगा। सीबीआई की जांच पूरी होने और रिपोर्ट पर आगे की सुनवाई के बाद मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।



