सीजी भास्कर, बेमेतरा, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के गिधवा-परसदा पक्षी विहार में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही विदेशी प्रवासी पक्षियों (Siberian Stonechat in Chhattisgarh) की चहचहाहट बढ़ने लगी है। गिधवा जलाशय में मैलार्ड बत्तख का जोड़ा दिखाई देने के बाद अब साइबेरिया से आने वाली छोटी चिड़िया साइबेरियन स्टोनचैट यानी काला पिद्दा भी नजर आई है। पक्षी मित्र जयंत जायसवाल के अनुसार, लगभग सभी प्रवासी पक्षी पक्षी विहार पहुंच चुके हैं। इससे पक्षी प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स का उत्साह बढ़ गया है।
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विदेशी पक्षियों का आगमन
बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक स्थित गिधवा-परसदा पक्षी विहार में हर साल सर्दियों के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इस बार मैलार्ड बत्तख के बाद साइबेरियन स्टोनचैट (Siberian Stonechat in Chhattisgarh) की मौजूदगी ने पक्षी प्रेमियों का ध्यान खींचा है। मैलार्ड बत्तख उत्तर अमेरिका, यूरोप और साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों से सर्दियां बिताने भारत आती है। हरे चमकदार सिर, पीली चोंच और भूरे सीने के कारण यह आसानी से आकर्षित करती है। वहीं, साइबेरियन स्टोनचैट अपनी खास बनावट और व्यवहार के लिए पहचानी जाती है।

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काला सिर, नारंगी-भूरी छाती
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, तस्वीर में दिखाई देने वाली साइबेरियन स्टोनचैट नर है। इसके काले सिर, गर्दन पर सफेद कॉलर और गहरी नारंगी-भूरी छाती से इसकी पहचान की जाती है। यह साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सर्दियों में भारत आती है।
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इस पक्षी की आवाज पत्थरों के टकराने जैसी सुनाई देती है। स्थानीय बर्ड गाइडों के मुताबिक, साइबेरियन स्टोनचैट अक्सर तारों, डालियों और झाड़ियों की ऊंची जगहों पर बैठती है। वहां से उड़कर कीड़े पकड़ती है और फिर उसी स्थान पर लौट आती है। काला पिद्दा (Siberian Stonechat in Chhattisgarh) खेतों और आसपास के इलाकों में मिलने वाले कीटों को खाता है। इस तरह यह प्राकृतिक रूप से कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करता है।
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अभयारण्य घोषित करने की मांग
गिधवा जलाशय में पर्याप्त जलभराव और शांत वातावरण प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है। यहां दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाती है। सर्दियों में प्रवासी पक्षियों (Siberian Stonechat in Chhattisgarh) के पहुंचने से यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और प्रकृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण बन गया है।
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स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों की मांग है कि गिधवा-परसदा को पक्षी अभयारण्य घोषित किया जाए। इसके साथ ही पक्षियों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने की मांग भी उठ रही है। लोगों का मानना है कि इससे क्षेत्र को नई पहचान मिलने के साथ ही प्रकृति पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।



