सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर : सरकारी नौकरी पाने के लिए जहां लाखों युवा सालों तक प्रतियोगी परीक्षाओं (Urban Company Income) की तैयारी करते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के एक युवक ने अपने हुनर के दम पर कमाई का अलग रास्ता चुना है। मुंबई में घर पहुंचकर बाल काटने और हेयर स्टाइलिंग की सेवा देने वाले इस युवक की मासिक बचत करीब एक लाख रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि वह अपनी कमाई पर इनकम टैक्स भी भरता है। युवक की इस कमाई की चर्चा अब सोशल मीडिया पर हो रही है।
सरकारी नौकरी से इनकार
यह कहानी तब चर्चा में आई, जब लेखक और फंड मैनेजर हर्ष गुप्ता मधुसूदन ने सोशल मीडिया पर युवक के साथ हुई बातचीत साझा की। बातचीत के दौरान उससे पूछा गया कि अगर उसे शुरुआती स्तर की सरकारी नौकरी मिल जाए, तो क्या वह अपना मौजूदा काम छोड़ देगा? युवक ने साफ इनकार कर दिया।
उसका कहना था कि उसे अपने काम में मिलने वाली आजादी और स्वतंत्र रूप से काम करने का तरीका पसंद है। वह किसी तय नौकरी के बजाय अपने कौशल के दम पर आगे बढ़ना चाहता है। युवक की कमाई (Urban Company Income) का यह उदाहरण बताता है कि कुछ लोग पारंपरिक नौकरी के बजाय अपने हुनर को कमाई का आधार बना रहे हैं।
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छह दिन करता है काम
बताया गया है कि युवक सप्ताह में छह दिन सुबह से देर रात तक ग्राहकों को सेवाएं देता है। आने-जाने और बुनियादी यात्रा खर्चों को घटाने के बाद उसकी मासिक बचत करीब एक लाख रुपये तक पहुंचती है। यह रकम उसकी कुल कमाई नहीं, बल्कि खर्चों के बाद बताई गई बचत है।
युवक अर्बन कंपनी के माध्यम से ग्राहकों के घर जाकर बाल काटने और हेयर स्टाइलिंग का काम करता है। प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस भी होती है। इसके अलावा वह नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न भी दाखिल करता है। इस तरह की कमाई (Urban Company Income) चर्चा में इसलिए है, क्योंकि यह सेवा आधारित काम में आर्थिक संभावनाओं की ओर ध्यान खींचती है।
परिवार की जिम्मेदारी
युवक का एक छोटा बेटा है, जो निजी प्री-स्कूल में पढ़ता है। उसकी पत्नी पहले कामकाजी थीं, लेकिन फिलहाल बच्चे की देखभाल के लिए उन्होंने काम से विराम लिया है। ऐसे में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से युवक की कमाई पर है।
उसकी कहानी बताती है कि कौशल आधारित काम से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतें पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की कमाई एक जैसी नहीं होती। ग्राहकों की संख्या, काम के घंटे, यात्रा खर्च और प्लेटफॉर्म की शर्तों का आय पर असर पड़ता है। इसलिए इस युवक की कमाई (Urban Company Income) को सभी कामगारों की सामान्य आमदनी का पैमाना नहीं माना जा सकता।
हुनर से बदलती तस्वीर
भारतीय समाज में लंबे समय से सरकारी नौकरी को स्थिरता, नियमित वेतन और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने सेवा क्षेत्र में काम करने वालों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। हेयर स्टाइलिंग जैसे कौशल के जरिए लोग ग्राहकों तक सीधे पहुंचकर अपनी सेवाओं से आय अर्जित कर रहे हैं।
इस मामले में टीडीएस कटने और आयकर रिटर्न दाखिल करने का पहलू भी अहम है। यह बताता है कि प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले व्यक्ति की आय कर व्यवस्था के दायरे में आ सकती है। हालांकि, गिग इकॉनमी में आमदनी काम की उपलब्धता, ग्राहकों की संख्या, खर्चों और प्लेटफॉर्म की शर्तों पर निर्भर करती है।
सरकारी नौकरी के प्रस्ताव को ठुकराने वाले इस युवक की कहानी बताती है कि सफलता का रास्ता केवल एक नहीं है। सही कौशल, मेहनत और ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप सेवाएं देने की क्षमता भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है।
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