सीजी भास्कर, 29 जुलाई : इस बार रक्षाबंधन पर्व पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने जा रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के प्रसिद्ध विष्णु भोग धान और सुगंधित चावल से तैयार की जा रही आकर्षक राखियां (Vishnu Bhog Rice Rakhi) बाजार में खास आकर्षण का केंद्र बनने वाली हैं। ये राखियां भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के साथ ही महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश भी देंगी।
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विष्णु भोग चावल से तैयार हो रही अनोखी राखियां
राज्य शासन की ग्रामीण आजीविका संवर्धन योजनाओं से जुड़ी बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने यह अभिनव पहल शुरू की है। महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हस्तकला का उपयोग करते हुए विष्णु भोग चावल से सुंदर और कलात्मक राखियां तैयार की हैं।

रंग-बिरंगे धागों, आकर्षक सजावट और सुगंधित चावल के मेल से बनी ये राखियां छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही हैं। खास बात यह है कि इन राखियों के जरिए प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।
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महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण
इस पहल को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में महिलाओं को राखी बनाने की आधुनिक तकनीक, डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने स्तर पर राखियों का निर्माण कर रही हैं। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है।
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रेलवे स्टेशन और कलेक्ट्रेट में लगेंगे बिक्री केंद्र
रक्षाबंधन के अवसर पर तैयार की गई इन विशेष राखियों की बिक्री के लिए जिले में अलग-अलग स्थानों पर विक्रय केंद्र बनाए जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट परिसर और ग्राम संगठन परिसरों में स्टॉल लगाए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से ग्राहक सीधे महिला समूहों से राखियां खरीद सकेंगे। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा Vishnu Bhog Rice Rakhi
महिला समूहों से जुड़ी सदस्यों का कहना है कि विष्णु भोग चावल से राखी बनाना उनके लिए केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि अपनी रचनात्मकता और पहचान को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
स्थानीय संसाधनों पर आधारित ऐसे नवाचार ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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वोकल फॉर लोकल का संदेश देंगी राखियां
विष्णु भोग चावल से बनी ये राखियां इस रक्षाबंधन पर वोकल फॉर लोकल, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत का संदेश भी देंगी। कृषि उत्पादों और पारंपरिक कला के मेल से तैयार यह पहल स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन का बेहतर उदाहरण बन रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का प्रसिद्ध विष्णु भोग चावल अब राखियों के माध्यम से प्रदेश और देशभर में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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