सीजी भास्कर, 1 अगस्त : गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम कसेकेरा के किसान हेमचंद साहू ने पारंपरिक खेती (Marigold Farming) से अलग राह चुनकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। धान की खेती छोड़ उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ Marigold Farming यानी गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती शुरू की और करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शुरू हुई इस पहल ने न केवल उनकी आय बढ़ाई, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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हेमचंद साहू ने अपनाई आधुनिक खेती Marigold Farming
हेमचंद साहू ने 0.48 हेक्टेयर भूमि में गेंदा फूल की खेती शुरू की। खेती के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में बढ़ोतरी हुई। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का उन्हें सीधा लाभ मिला।
रायपुर तक पहुंची फूलों की बिक्री
हेमचंद साहू ने अपने खेत में तैयार गेंदा फूलों की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ रायपुर में भी की। अच्छी गुणवत्ता और बाजार में लगातार मांग रहने के कारण उन्हें करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि पहले धान की खेती से सीमित आमदनी होती थी, लेकिन फूलों की खेती ने परिवार की आर्थिक स्थिति को काफी मजबूत कर दिया है।
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दूसरे किसान भी अपना रहे गेंदा की खेती Marigold Farming
हेमचंद साहू की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान अब गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में बागवानी आधारित खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है।
उद्यानिकी विभाग ने बताई आधुनिक तकनीक की अहमियत
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त (Marigold Farming) किया जा सकता है। इससे जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
विभाग का मानना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी फसलों को भी अपनाएं, तो उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
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