सीजी भास्कर, 7 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ फसलों की गिरदावरी (New Girdawari Rules) प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब खेत में बोई गई फसल की जानकारी सिर्फ रिकॉर्ड के आधार पर दर्ज नहीं होगी, बल्कि उसकी पुष्टि के लिए खसरा-वार फोटो मोबाइल ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी है।
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डिजिटल होगी गिरदावरी प्रक्रिया
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बार गिरदावरी (New Girdawari Rules) के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की है। यदि किसान ने धान की जगह दूसरी फसल बोई है या खेत खाली छोड़ा है, तो संबंधित खेत की फोटो लेकर मोबाइल ऐप पर अपलोड करनी होगी।
इससे खेत में मौजूद वास्तविक फसल और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान आसानी से किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि खेत में जो फसल हो, वही रिकॉर्ड में दर्ज हो। इससे सरकारी योजनाओं, समर्थन मूल्य पर खरीदी और किसानों को मिलने वाले लाभ में पारदर्शिता आएगी।
सात स्तरों पर होगा फसल सत्यापन
नई व्यवस्था में गिरदावरी की जांच केवल पटवारी स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। फसल रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए सात स्तरों पर सत्यापन किया जाएगा। पटवारी अपने क्षेत्र के 100 प्रतिशत कृषि रकबे की जांच करेंगे। वहीं राजस्व निरीक्षक और कृषि विस्तार अधिकारी 25-25 प्रतिशत क्षेत्र का सत्यापन करेंगे। तहसीलदार और नायब तहसीलदार 10 प्रतिशत, एसडीओ 5 प्रतिशत, जिला स्तरीय अधिकारी 1 प्रतिशत और संभाग व राज्य स्तर के अधिकारी 0.1 प्रतिशत क्षेत्र का औचक निरीक्षण करेंगे।
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फसल बदलने पर फोटो होगी जरूरी
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव फसल परिवर्तन को लेकर किया गया है। यदि किसान ने धान के स्थान पर कपास, दलहन, तिलहन या अन्य कोई फसल लगाई है तो खेत की फोटो अपलोड करनी होगी। फोटो खसरा नंबर के आधार पर दर्ज होगी, जिससे भविष्य में किसी तरह के विवाद की स्थिति न बने।
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गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई
सरकार ने गिरदावरी में लापरवाही या गलत जानकारी दर्ज करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यदि खेत की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार माने जाएंगे।
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20 सितंबर तक पूरा होगा अभियान
गिरदावरी अभियान के लिए समय-सीमा भी तय कर दी गई है। 20 सितंबर तक गिरदावरी, डेटा एंट्री और त्रुटि सुधार का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद 25 सितंबर को ग्रामवार प्रारंभिक फसल क्षेत्र का डेटा जारी होगा। किसानों की आपत्तियों के निराकरण के बाद 30 सितंबर तक अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
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गांव-गांव होगी जानकारी, किसानों को मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए गांवों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि डिजिटल गिरदावरी से वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ मिलेगा और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने वालों पर रोक लगेगी। नई (New Girdawari Rules) व्यवस्था से समर्थन मूल्य खरीदी में पारदर्शिता बढ़ने और कृषि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
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