सीजी भास्कर, 19 अगस्त। रायपुर में छत्तीसगढ़ भू-संपदा अपीलीय अधिकरण की नई अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त जस्टिस रजनी दुबे ने पदभार (RERA Tribunal) संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने साफ कर दिया कि RERA Tribunal में लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी। इससे मकान और जमीन से जुड़े विवादों में फंसे खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में देरी, अवैध कॉलोनियों, बिना पंजीयन वाले प्रोजेक्ट और खरीदारों की रकम दूसरे प्रोजेक्ट में लगाने जैसे मामलों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। जस्टिस दुबे ने कहा कि ऐसे मामलों में नियमों के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि खरीदारों के हित सुरक्षित रह सकें।

पुराने मामलों की होगी जल्द सुनवाई
जस्टिस रजनी दुबे की नियुक्ति पांच साल या 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक के लिए की गई है। उन्होंने मंगलवार को रायपुर में पदभार ग्रहण किया। इसके बाद उन्होंने अधिकरण की कार्यप्रणाली और आने वाले समय की प्राथमिकताओं को लेकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की शीघ्र सुनवाई और त्वरित निपटारा जरूरी है। इससे विवाद में फंसे पक्षों को समय पर राहत मिलेगी। वहीं, किसी पक्ष के फैसले से असंतुष्ट होने पर उसे आगे अपील करने के लिए भी पर्याप्त समय मिल सकेगा।
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अवैध कॉलोनियों पर होगी कार्रवाई
बिना पंजीयन या जरूरी डायवर्सन के चल रहे प्रोजेक्ट और अवैध कॉलोनियों से प्रभावित लोगों को पहले रेरा अथॉरिटी में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत मिलने के बाद बिल्डर को नोटिस जारी कर दोनों पक्षों की बात सुनी जाती है।
जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आने पर प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के साथ जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट में खरीदारों को कब्जा दिलाने के संबंध में भी रेरा अथॉरिटी आदेश जारी कर सकती है।
यदि किसी पक्ष को अथॉरिटी का आदेश स्वीकार नहीं होता और वह उसे चुनौती देता है, तो मामला अपील के रूप में अधिकरण के सामने पहुंचता है।
खरीदारों की रकम दूसरे प्रोजेक्ट में लगाने पर सख्ती
जस्टिस दुबे ने बताया कि कई मामलों में बिल्डर खरीदारों से मिली राशि को दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते हैं। इसका सीधा असर निर्माण कार्य और समय पर कब्जा देने पर पड़ता है।
ऐसी स्थिति में रेरा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अथॉरिटी बिल्डर पर जुर्माना लगाने के साथ खरीदार को ब्याज दिलाने का आदेश भी दे सकती है।
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आदेश नहीं मानने वाले बिल्डरों पर शिकंजा
रेरा के आदेशों का पालन नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अपील से जुड़े मामलों में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अधिकरण तथ्यों और कानून के आधार पर उचित आदेश जारी करेगा। जस्टिस दुबे ने संकेत दिया कि मामलों को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने के बजाय समय पर निर्णय देने पर जोर रहेगा।
न्यायिक अनुभव से मिलेगी मदद
जस्टिस रजनी दुबे ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1990 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। सिविल और आपराधिक दोनों तरह के मामलों में काम करने के अलावा उन्होंने हाई कोर्ट में करीब आठ वर्ष तक न्यायिक दायित्व निभाया।
उनके मुताबिक रेरा से जुड़े मामलों में सिविल प्रक्रिया के साथ कई बार दंडात्मक पहलू भी सामने आते हैं। ऐसे में लंबे न्यायिक अनुभव का लाभ अधिकरण में मामलों की सुनवाई के दौरान मिलेगा।
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पुराने मामलों में मिला न्याय सबसे संतोषजनक
अपने न्यायिक कार्यकाल को याद करते हुए जस्टिस दुबे ने सर्विस मैटर्स से जुड़े मामलों को विशेष रूप से संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि जब 10 से 20 साल पुराने मामलों में किसी व्यक्ति को उसका अधिकार या पेंशन मिलती थी और वह भावुक हो जाता था, तब त्वरित न्याय के महत्व का वास्तविक अनुभव होता था।
पारिवारिक और वैवाहिक मामलों में भी उनकी प्राथमिकता समझौते के जरिए विवाद खत्म कराने की रही। खासकर बच्चों के हित में परिवार को टूटने से बचाने की कोशिश की जाती थी। जहां समझौते की गुंजाइश नहीं रहती थी, वहां महिलाओं और बच्चों के भरण-पोषण तथा उनके भविष्य की उचित व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता था।
बलौदाबाजार के पांच महिलाओं की हत्या मामले का भी किया जिक्र
जस्टिस रजनी दुबे ने बलौदाबाजार के उस मामले का भी जिक्र किया, जिसमें एक ही परिवार की पांच महिलाओं की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
उन्होंने बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की रेयरेस्ट ऑफ रेयर गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए दिया गया था। संपत्ति हड़पने के लिए असहाय महिलाओं की हत्या जैसे गंभीर अपराध को देखते हुए कड़ी सजा जरूरी मानी गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।
अब रेरा अधिकरण में उनकी जिम्मेदारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से लंबित मामलों को गति देने और रियल एस्टेट विवादों में खरीदारों के हितों की रक्षा करने की होगी। इससे RERA Tribunal में अटके मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ी है।
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