सीजी भास्कर, 30 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 77 वर्षीय संतानहीन विधवा को बड़ी राहत देते हुए उसके तीन सौतेले बेटों को हर महीने कुल 9 हजार रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सौतेला संबंध होने के आधार पर महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। सौतेली मां को गुजारा भत्ता (Stepmother Maintenance) देने का आदेश सितंबर 2026 से लागू होगा।
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तीनों बेटों को देने होंगे 3-3 हजार रुपए
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि संतानहीन विधवा सौतेली मां, जो खुद अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, उपयुक्त परिस्थितियों में सौतेले बेटों से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। कोर्ट ने तीनों सौतेले बेटों को हर महीने 3-3 हजार रुपए देने का निर्देश दिया है। इस तरह तीनों बेटों को मिलकर हर माह कुल 9 हजार रुपए देने होंगे। सौतेली मां को गुजारा भत्ता (Stepmother Maintenance) का भुगतान नियमित रूप से करना होगा।
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पति की मौत के बाद बेटों ने की उपेक्षा
मामला बिलासपुर निवासी 77 वर्षीय सनकैया बाई से जुड़ा है। उन्होंने अपने दिवंगत पति पुरुषोत्तम सोनी की संतान और अपने सौतेले बेटों भीषण प्रसाद उर्फ गोवर्धन सोनी, लोचन प्रसाद सोनी और दीपक प्रसाद सोनी के खिलाफ भरण-पोषण की मांग की थी।
महिला के मुताबिक, उसके पति की वर्ष 2021 में मौत के बाद सौतेले बेटों ने उसकी देखभाल बंद कर दी। वह संतानहीन है और उसके पास अपनी आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है। वर्तमान में वह अपनी विधवा बेटी के साथ रहकर जीवनयापन कर रही है।
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बचपन से पालन-पोषण करने का दावा
सनकैया बाई ने फैमिली कोर्ट में बताया था कि तीनों सौतेले बेटे बचपन से उनके साथ रहते थे और उन्होंने उनका पालन-पोषण किया। पति के जीवित रहने तक बेटे उनकी देखभाल करते थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद बेटों के व्यवहार में बदलाव आ गया।
महिला ने यह भी दावा किया कि परिवार की कृषि भूमि से उसके सौतेले बेटे आय प्राप्त कर रहे हैं। उसने कृषि भूमि से जुड़े राजस्व दस्तावेज, राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए थे।
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फैमिली कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट ने किया निरस्त
फैमिली कोर्ट में तीनों बेटों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाए। 18 फरवरी 2025 को उन्हें एकतरफा कर दिया गया। हाई कोर्ट में भी नोटिस की तामील के बावजूद तीनों बेटे पेश नहीं हुए।
बिलासपुर फैमिली कोर्ट ने 5 अप्रैल 2025 के आदेश में महिला का भरण-पोषण आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया था कि संबंधित तीनों बच्चे उसके सौतेले बेटे हैं। हाई कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कृतिकांत डी. वाडोरिया बनाम गुजरात राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि संतानहीन सौतेली मां, जो विधवा है या जिसका पति उसकी देखभाल करने में सक्षम नहीं है, परिस्थितियों के अनुसार सौतेले बेटे से भरण-पोषण मांग सकती है।
हाई कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले दीनबंधु बनाम बिराजो बाई का भी उल्लेख किया, जिसमें संतानहीन और अकेली सौतेली मां के सौतेले बेटों से भरण-पोषण के अधिकार को स्वीकार किया गया था।
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सितंबर से मिलेगा हर माह 9 हजार रुपए
हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने महिला की उम्र, विधवा और संतानहीन होने की स्थिति, आय के स्वतंत्र साधन नहीं होने तथा सौतेले बेटों द्वारा उपेक्षा किए जाने के दावों पर कानून के अनुरूप विचार नहीं किया। केवल सौतेला संबंध होने के आधार पर भरण-पोषण से इनकार करना कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए तीनों सौतेले बेटों को सितंबर 2026 से 3-3 हजार रुपए प्रतिमाह, यानी कुल 9 हजार रुपए मासिक सौतेली मां को गुजारा भत्ता (Stepmother Maintenance) देने का आदेश दिया है। बकाया राशि भी नियमानुसार चुकानी होगी और आगे हर महीने बिना चूक भुगतान करना होगा।
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