सीजी भास्कर, 30 अगस्त 2026 : बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड (Jhiram Valley Case) मामले में 31 अगस्त को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत का फैसला आने की उम्मीद है। फैसले से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 2013 में हुए नक्सली हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही है।
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झीरम घाटी के प्रत्यक्षदर्शी रहे सिंहदेव
टीएस सिंहदेव ने बताया कि वे झीरम घाटी की घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं। उन्होंने जगदलपुर पहुंचकर NIA के सामने घटना से जुड़ी अपनी आंखों देखी जानकारी और महत्वपूर्ण तथ्यों का बयान दर्ज कराया था।
सिंहदेव के मुताबिक, घटना वाले दिन पूरे इलाके में पुलिस की मौजूदगी लगभग नहीं के बराबर थी। उन्होंने कहा कि घटनास्थल की ओर जाने वाले रास्ते में पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती नजर नहीं आई थी। उनके बयान में घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था समेत कई अहम पहलुओं का उल्लेख किया गया है।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सिंहदेव ने कहा कि झीरम घाटी हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। उनका मानना है कि घटना से जुड़े तथ्यों की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सुरक्षा में चूक के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था।
झीरम घाटी मामला (Jhiram Valley Case) लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय रहा है। हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।
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जिम्मेदारी तय होने पर मिलेगा न्याय का संतोष
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जांच और अदालत के फैसले में उनके द्वारा बताए गए तथ्यों को जगह मिलती है और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी तय होती है, तभी पीड़ित परिवारों और कांग्रेस नेताओं को न्याय मिलने का वास्तविक संतोष होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फैसला आ जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि झीरम घाटी मामला (Jhiram Valley Case) में घटना के पीछे की जिम्मेदारी और पूरे घटनाक्रम से जुड़े सवालों का स्पष्ट होना भी जरूरी है।
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31 अगस्त के फैसले पर टिकी नजर
अब सभी की नजरें 31 अगस्त को आने वाले NIA विशेष अदालत के फैसले पर टिकी हैं। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद से ही इसके पीछे की साजिश, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
फैसले के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने मामले में सामने आए तथ्यों और आरोपों पर क्या निष्कर्ष निकाला है। झीरम घाटी मामला (Jhiram Valley Case) को लेकर पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की नजर अब अदालत के फैसले पर है।
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