BRICS की बढ़ती सदस्य संख्या बनी चुनौती : BRICS Expansion India Challenge
सीजी भास्कर, 12 सितम्बर। नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच संगठन के भविष्य और उसकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के मुताबिक, BRICS में लगातार नए देशों के शामिल होने से सदस्य देशों के बीच किसी साझा मुद्दे पर सहमति बनाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। वर्तमान में सदस्यों और साझेदार देशों को मिलाकर समूह में 21 देश शामिल हैं। (BRICS Expansion India Challenge)
कुगेलमैन के अनुसार, भारत सम्मेलन की सफलता को एक ठोस साझा बयान जारी कराने की क्षमता से भी देखेगा। इसके लिए सभी सदस्य देशों के बीच न्यूनतम सहमति बनाना जरूरी होगा। सदस्यों की संख्या और हितों में विविधता बढ़ने के साथ यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
ईरान संकट और अमेरिका का रुख बड़ी चुनौती
भारत के सामने सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख कूटनीतिक चुनौतियां बताई जा रही हैं। पहली चुनौती ईरान से जुड़ी मौजूदा स्थिति है। BRICS में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों शामिल हैं, ऐसे में क्षेत्रीय तनाव के बीच किसी साझा रुख पर पहुंचना आसान नहीं होगा।
दूसरी चुनौती अमेरिका से जुड़े मुद्दे को लेकर है। रूस, ईरान और संभवतः चीन जैसे देश ऐसे साझा बयान की मांग कर सकते हैं, जिसमें अमेरिकी नीतियों की आलोचना हो। वहीं भारत समेत कई अन्य सदस्य अमेरिका के साथ अपने संबंधों को प्रभावित नहीं करना चाहेंगे। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है।

भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व दिखाने का मौका : BRICS Expansion India Challenge
कुगेलमैन के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बीच BRICS के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है। विकासशील देश वैश्विक व्यवस्था में विकल्प तलाश रहे हैं और ऐसे में BRICS अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
उनका मानना है कि भारत के लिए यह सम्मेलन वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर है। हालांकि, संगठन के विस्तार के साथ एकता बनाए रखना नई दिल्ली के लिए बड़ी चुनौती भी होगी।
BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी। वर्ष 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। ये देश 2009 में एक समूह के रूप में साथ आए। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। वर्ष 2024 में ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात इसमें शामिल हुए, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी सदस्य बना। सऊदी अरब को भी सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया है, लेकिन उसने अभी तक औपचारिक रूप से निमंत्रण स्वीकार नहीं किया है।
सम्मेलन (BRICS Expansion India Challenge) से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS बिजनेस फोरम के कार्यक्रम में कहा कि संगठन के देश वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए समुद्री मार्ग सुरक्षित रखना, आपूर्ति मार्ग खुले रखना और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती बाधाओं के बीच भारत आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर काम कर रहा है।



