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Fish Farming Business  : धान की खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी किसानों की आमदनी 

By Newsdesk Admin
16/09/2026
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Fish Farming Business  : धान की खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी किसानों की आमदनी 
Fish Farming Business  : धान की खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी किसानों की आमदनी 

सीजी भास्कर, 16 सितंबर : पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन (Fish Farming Business) अब किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया बन रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और सरकारी अनुदान से किसान आय के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

Contents
  • महासमुंद में 150 किसान मछली पालन से जुड़े
  • बिरकोनी के दिनेश चंद्राकर ने शुरू की हैचरी
  • 8 से 9 महीने में तैयार होती है 15 टन मछली
  • हिमांशु चंद्राकर को पाउंड लाइनर यूनिट से लाभ
  • गांव में ही मजदूरों को मिल रहा रोजगार
  • महिलाओं और एससी-एसटी हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान
  • खेती के साथ मछली पालन से आत्मनिर्भरता की राह

पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन बन रहा अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया

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महासमुंद में 150 किसान मछली पालन से जुड़े

महासमुंद जिले में करीब 150 किसान धान की खेती के साथ मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी गतिविधियों को अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक सुविधाओं और विभिन्न परियोजनाओं के लिए सहायता दी जा रही है। योजना के तहत नए तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन बन रहा अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया

बिरकोनी के दिनेश चंद्राकर ने शुरू की हैचरी

बिरकोनी निवासी दिनेश चंद्राकर ने पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन शुरू किया। कृषि में बढ़ती लागत के बीच उन्होंने आय के नए विकल्प के तौर पर इस गतिविधि को अपनाया। योजना के तहत उन्होंने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब बनवाया। इसके अलावा 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी स्थापित की।

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8 से 9 महीने में तैयार होती है 15 टन मछली

दिनेश चंद्राकर की हैचरी में तैयार मछली के बच्चों को तालाब में डाला जाता है। करीब 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है। मछली उत्पादन में करीब 70 से 80 रुपए प्रति किलो लागत आती है। बाजार में 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक्री होने से उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है। इससे मछली पालन से अतिरिक्त आय (Fish Farming Business) का रास्ता मजबूत हुआ है।

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हिमांशु चंद्राकर को पाउंड लाइनर यूनिट से लाभ

ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद सभी खर्च निकालकर उन्हें सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपए की शुद्ध बचत हो रही है।

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गांव में ही मजदूरों को मिल रहा रोजगार

मछली पालन से यूनिट संचालकों के साथ स्थानीय मजदूरों को भी रोजगार मिला है। बिरकोनी के मजदूरों के अनुसार अब उन्हें काम की तलाश में बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही सालभर नियमित रोजगार मिलने से उनकी आय का जरिया मजबूत हुआ है। मजदूरों को करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह तक की आय हो रही है। इससे परिवारों के भरण-पोषण में भी मदद मिल रही है।

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महिलाओं और एससी-एसटी हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत नए तालाब, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जा रही है। महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। वहीं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों के लिए 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।

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खेती के साथ मछली पालन से आत्मनिर्भरता की राह

महासमुंद में धान की पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन को अपनाने वाले किसानों के लिए आय के नए अवसर बन रहे हैं। तालाब, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी गतिविधियों से किसान अतिरिक्त आमदनी हासिल कर रहे हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है। मछली पालन से ग्रामीण आय (Fish Farming Business) बढ़ाने की यह पहल किसानों के लिए स्वरोजगार का नया विकल्प तैयार कर रही है।

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