सीजी भास्कर, 17 सितंबर : रिहायशी इलाके में देर रात पेड़ पर भालू दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई। करीब एक घंटे तक भालू पेड़ पर बैठा रहा और इस दौरान लोगों ने मोबाइल से उसकी तस्वीरें और वीडियो बनाए। भालू की मौजूदगी (Kanker Bear Sighting) से इलाके में सतर्कता बढ़ गई है।

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घटना कांकेर शहर के इमलीपारा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की है। 15 सितंबर की रात करीब 10 से 11 बजे रहवासियों ने पेड़ पर भालू को आराम करते देखा। कॉलोनी में 150 से अधिक क्वार्टर हैं और आसपास बच्चों की आवाजाही भी रहती है।
लोगों ने बनाए वीडियो
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भालू काफी देर तक पेड़ पर बैठा रहा। उसे देखकर लोगों ने आसपास जाने से बचते हुए मोबाइल कैमरे से तस्वीरें और वीडियो बनाए। रिहायशी परिसर में भालू पहुंचने की सूचना के बाद लोगों में रात के समय अतिरिक्त सतर्कता देखी गई।
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कॉलोनी के आसपास छोटे बच्चे खेलते हैं। ऐसे में रिहायशी इलाके में भालू (Kanker Bear Sighting) की मौजूदगी को सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है। रहवासियों का कहना है कि रात में बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
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गांवों के बाद शहर तक पहुंच रहे भालू
कांकेर जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में भालुओं की आवाजाही पहले भी सामने आती रही है। सरोना क्षेत्र के कई गांवों में भालुओं के घरों और रिहायशी इलाकों के आसपास पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं।
भोजन की तलाश में वन्यजीवों के बस्तियों की ओर आने की घटनाओं से ग्रामीणों में चिंता बनी रहती है। अब शहर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भालू की दस्तक (Kanker Bear Sighting) ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं।
डोंगरकट्टा में पिता-पुत्र की मौत
जनवरी 2025 में डोंगरकट्टा क्षेत्र में भालू के हमले में पिता-पुत्र की मौत की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में भालू के हमलों को लेकर चिंता बढ़ी थी।
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नरहरपुर में भाई-बहन की मौत
अगस्त 2026 में नरहरपुर क्षेत्र में भालू के हमले में भाई-बहन की मौत और एक महिला के घायल होने की घटना सामने आई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता बनी हुई है।
2022 से 2025 के बीच 11 मौतें
कांकेर वन मंडल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच भालू और तेंदुए के हमलों में कुल 11 लोगों की मौत हुई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए। यह आंकड़ा भालू और तेंदुए के हमले (Kanker Bear Sighting) दोनों को मिलाकर है।
इसलिए केवल भालू के हमलों में हुई मौतों का अलग-अलग वर्षवार आंकड़ा इससे निर्धारित नहीं किया जा सकता। भालू से संबंधित मौतों का सटीक वर्षवार आंकड़ा वन विभाग से अलग से लिया जाना जरूरी है।
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बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही को देखते हुए रहवासियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि रात के समय कॉलोनी और आसपास के हिस्सों में भालू की आवाजाही (Kanker Bear Sighting) को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है। शहर के रिहायशी क्षेत्र में भालू के पहुंचने की घटना यह भी बताती है कि वन क्षेत्रों से लगे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती केवल गांवों तक सीमित नहीं रह गई है।
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