सीजी भास्कर, 23 सितंबर : सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी के पुन: उपयोग (Chhattisgarh Treated Water) को बढ़ावा देने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। निकायों को एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
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उद्योगों से रेलवे तक तलाशे जाएंगे उपयोगकर्ता
राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने संबंधित नगर निगमों को परिपत्र जारी कर उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा है। इसके लिए थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से संपर्क किया जाएगा। निकायों को यह भी पता लगाना होगा कि संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में पानी की आवश्यकता है। इस कवायद (Chhattisgarh Treated Water) का उद्देश्य एसटीपी शुरू होने के बाद उपचारित पानी के उपयोग के लिए पहले से व्यवस्था तैयार करना है।
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6 नगर निगमों में बन रहे 338 एमएलडी के STP
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के तहत राज्य के छह नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन हैं। इनमें बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के एसटीपी शामिल हैं। इन प्लांटों से निकलने वाले पानी के पुन: उपयोग (Chhattisgarh Treated Water) के लिए संभावित मांग पहले से चिन्हित करने की योजना बनाई गई है।
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50 किलोमीटर की परिधि में होगी पड़ताल
सूडा के निर्देश के अनुसार प्रत्येक निकाय अपने एसटीपी के आसपास 50 किलोमीटर की परिधि में संभावित उपयोगकर्ताओं की तलाश करेगा। थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों के अलावा रेलवे, सरकारी विभाग और अन्य संस्थानों से भी संपर्क किया जाएगा। इस दौरान संस्थानों की मौजूदा और संभावित जल आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इससे उपचारित जल (Chhattisgarh Treated Water) की उपलब्धता और संभावित मांग के बीच बेहतर समन्वय बनाया जा सकेगा।
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केंद्र सरकार और NGT के निर्देशों के अनुरूप पहल
सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरौदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगांव नगर निगमों के आयुक्तों को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। परिपत्र में बताया गया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी उपचारित जल के पुन: उपयोग को लेकर निर्देश दिए हैं।
15 दिनों में देनी होगी जानकारी
निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता से जुड़ी जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके आधार पर उपचारित पानी के उपयोग की आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। विभाग का जोर है कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल बेकार न जाए और उसका उपयोग उद्योगों, संस्थानों तथा अन्य जरूरतों में किया जा सके। इसके लिए संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान (Chhattisgarh Treated Water) पहले ही पूरी करने की तैयारी है।



