सीजी भास्कर, 7 अक्टूबर : त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ साइबर ठगों ने भी ठगी के तरीके (Digital Arrest) बदल दिए हैं। अब ठग बैंक खाते या एटीएम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट को निशाना बनाकर लोगों को चूना लगा रहे हैं। आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधि भी इनके निशाने पर आ रहे हैं।
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हैक से लेकर OTP तक नए तरीके
साइबर ठगी (Digital Arrest) के मामलों में ठग कभी कोरियर पहुंचाने के नाम पर छह अंकों का कोड पूछ रहे हैं तो कभी वॉट्सऐप का नियंत्रण हासिल कर कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा यूपीआई, ओटीपी, ऑनलाइन बुकिंग, आकर्षक ऑफर, लकी ड्रॉ और इंश्योरेंस के नाम पर भी लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से डिजिटल लेन-देन के दौरान सतर्क रहने की अपील की है।
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साइबर ठगी के प्रमुख तरीके
- बीते दो वर्षों में 475 साइबर ठग गिरफ्तार किए गए हैं।
- शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर फर्जी योजनाओं के जरिए ठगी की जा रही है।
- कोरियर डिलीवरी के नाम पर OTP या छह अंकों का कोड मांगा जा रहा है।
- UPI, बुकिंग, ऑफर, लकी ड्रॉ और इंश्योरेंस के नाम पर जानकारी हासिल की जा रही है।
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केस-1: विधायक का मोबाइल हैक, पैसों की मांग
6 अक्टूबर को धरसींवा विधायक अनुज शर्मा का मोबाइल नंबर हैक (Digital Arrest) होने का मामला सामने आया। विधायक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके नंबर से लोगों से पैसों की मांग की जा रही है। विधायक ने लोगों से अपील की कि उनके नंबर से आने वाले किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज का जवाब न दें और किसी को पैसे ट्रांसफर न करें।
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केस-2: यूपीआई से 90 हजार रुपए की ठगी
गंज थाना क्षेत्र में जेल कॉलोनी निवासी चंद्रकांत सिन्हा साइबर ठगी (Digital Arrest) का शिकार हो गए। पुलिस के मुताबिक 6 अक्टूबर को उनके खाते से 90 हजार रुपए पार हो गए। बताया गया कि फोनपे, पेटीएम और यूपीआई जैसे एप काम नहीं कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने मोबाइल को सर्विस सेंटर में दिया। बाद में एप दोबारा डाउनलोड करने पर उन्हें पता चला कि उनके एसबीआई खाते से 90 हजार रुपए निकल चुके हैं।
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केस-3: कोरियर के नाम पर WhatsApp का कंट्रोल
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ठग अब रैंडम नंबरों पर कॉल करके लोगों को कोरियर डिलीवरी के नाम पर झांसे में ले रहे हैं। ठग कहते हैं कि घर के बाहर कोरियर पहुंचा है और डिलीवरी के लिए मोबाइल पर छह अंकों का पासकोड भेजा गया है। जैसे ही व्यक्ति यह कोड ठग को बताता है, उसके वॉट्सऐप अकाउंट का नियंत्रण ठग के हाथ में जाने का खतरा रहता है। इसके बाद ठग कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को मैसेज कर पैसों की मांग कर सकते हैं।
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केस-4: 44 दिन तक Digital Arrest
रायपुर में साइबर ठगों ने खुद को ईडी और आईबी का अधिकारी बताकर एक कारोबारी को 44 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) में रखने का दावा किया और उससे 8.50 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने कारोबारी से कहा कि उसके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। इसके बाद जेल भेजने और परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कराने की धमकी देकर लगातार पैसे की मांग की गई। दबाव में कारोबारी ने अलग-अलग बैंक खातों में 8.50 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम जुटाने के लिए उसने अपनी जमा-पूंजी के साथ सोने के जेवर भी बेच दिए। ठग उसे लगातार वीडियो कॉल पर उपलब्ध रहने और अपडेट देने के लिए कहते थे।
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साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें
रायपुर रेंज साइबर क्राइम के डीएसपी निशित अग्रवाल ने त्योहारी सीजन में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से खुद जागरूक रहने के साथ दूसरों को भी साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने को कहा। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान लेन-देन से बचें। किसी लालच या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि साइबर अपराध (Digital Arrest) हो जाए तो तत्काल 1930 पर कॉल करें और नजदीकी थाने में भी सूचना दें।
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