सीजी भास्कर, 9 अक्टूबर : चांपा से उरगा और आगे कटघोरा तक बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (Champa Katghora NH) को लेकर चार साल से जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटने लगी है। पहले चरण में 10 गांवों की जमीनों की रजिस्ट्री पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के मुताबिक, शेष प्रभावित गांवों में भी चरणबद्ध तरीके से राहत दी जाएगी। इससे अपनी जमीन बेचने या अन्य जरूरतों के लिए उसका उपयोग करने का इंतजार कर रहे हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी।

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पहले चरण में 10 गांव
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण (Champa Katghora NH) के संभावित दायरे में आने के कारण 51 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई थी। अलाइनमेंट तय करने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी के चलते ग्रामीण लंबे समय से परेशान थे। प्रशासन के आदेश के अनुसार, पहले चरण में भिलाईखुर्द, पंडरीपानी, जेंजरा, बिरवट, सोनपुरी, महेशपुर, नवागांव, गोपालपुर, डोडकधरी और छुरीकला गांवों में प्रतिबंध शिथिल किया गया है।
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मंत्री की पहल पर कार्रवाई
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रभावित ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम उठाने की पहल की थी। इसके बाद प्रशासन ने जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगी रोक में राहत देने की कार्रवाई की। मंत्री ने कहा कि करीब चार साल से प्रतिबंध के कारण ग्रामीण अपनी ही जमीन का सौदा नहीं कर पा रहे थे। अब वे जमीन बेचकर शादी, घरेलू जरूरतों और अन्य जरूरी कामों के लिए धन की व्यवस्था कर सकेंगे।
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कुछ जमीनों पर रोक बरकरार
कलेक्टर के आदेश के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 149-बी के चांपा-कोरबा-छुरी-कटघोरा पैकेज-2 में किलोमीटर 38.200 से 80.295 तक प्रस्तावित फोरलेन निर्माण क्षेत्र में यह राहत दी गई है। हालांकि, संबंधित गांवों में चिह्नित खसरों और उनसे लगी 100 मीटर तक की जमीन को छोड़कर बाकी भूमि पर ही प्रतिबंध शिथिल किया गया है। यानी सभी जमीनों पर से रोक पूरी तरह नहीं हटी है। परियोजना के अन्य प्रभावित गांवों में पहले की तरह प्रतिबंध लागू रहेंगे।
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2017 में मिली थी मंजूरी
चांपा-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (Champa Katghora NH) को वर्ष 2017 में मंजूरी मिली थी। इसके दो चरण हैं। चांपा से उरगा तक 38.2 किलोमीटर का पहला चरण 630 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो चुका है। वहीं, उरगा से कटघोरा तक करीब 38 किलोमीटर लंबे दूसरे चरण की शुरुआती लागत 999 करोड़ रुपये निर्धारित थी। प्रशासनिक देरी के कारण इसकी लागत बढ़कर करीब 1,200 करोड़ रुपये हो गई है। आगे लागत बढ़ने की भी संभावना जताई गई है।
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हजारों ग्रामीणों को राहत
जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक में ढील से प्रभावित परिवारों को आर्थिक जरूरतों के लिए अपनी भूमि का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राहत केवल आदेश में निर्धारित गांवों और जमीनों पर लागू होगी। बाकी क्षेत्रों में प्रतिबंध हटाने की कार्रवाई आगे की प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
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