सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर : सालभर खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों की फसल अगर काले पानी की चपेट में आने लगे, तो उनकी मेहनत और कमाई का क्या होगा? खेतों में कथित तौर पर पहुंच रहे गंदे पानी, फसल खराब होने की शिकायतों और मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों की परेशानी ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी खेती पर संकट मंडरा रहा है, लेकिन नुकसान की जांच और राहत को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। नगरनार में प्रदूषण के आरोप (NMDC Pollution Allegations) के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसानों की शिकायतें कौन सुनेगा और उन्हें राहत कब मिलेगी?
यह भी पढ़ें : Ahivara Amrut 2 Park Tender : अहिवारा में अमृत-2 के पार्क निर्माण पर सवाल, फर्म के अनुभव और स्थल चयन की जांच की मांग
खेतों तक काला पानी
स्थानीय लोगों के आरोपों के अनुसार, यह मामला बस्तर संभाग के जगदलपुर क्षेत्र में स्थित नगरनार के एनएमडीसी स्टील प्लांट (NMDC Pollution Allegations) के आसपास का है। ग्रामीणों का दावा है कि प्लांट के पीछे की ओर से निकलने वाला काला और गंदा पानी आसपास के खेतों तक पहुंच रहा है। किसानों को आशंका है कि इससे उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है।
यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल खेतों तक गंदा पानी पहुंचने का नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आजीविका और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित असर की जांच भी जरूरी होगी। हालांकि, पानी के स्रोत, उसकी गुणवत्ता और फसलों पर उसके प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
फसलें खराब, कमाई पर मार
किसानों के लिए फसल सिर्फ खेत में खड़ी उपज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आजीविका का आधार होती है। बीज, खाद, सिंचाई और मेहनत पर खर्च करने के बाद यदि उत्पादन प्रभावित होता है, तो आर्थिक नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होता। नगरनार में कथित काले पानी से फसल नुकसान (NMDC Pollution Allegations) की शिकायतों ने इसी चिंता को सामने ला दिया है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि खेतों और आसपास के जलक्षेत्रों में सांप, बिच्छू, केकड़े और मछलियां भी मृत मिल रही हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जलस्रोतों और मिट्टी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच से ही पता चल सकेगा कि पानी में प्रदूषक मौजूद हैं या नहीं और उनका फसल तथा जलीय जीवन पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं।
यह भी पढ़ें : Navratri Security : नवरात्रि में सुरक्षा को लेकर पुलिस सतर्क, रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर प्रतिबंध
धुएं और धूल पर सवाल
ग्रामीणों ने रात के समय प्लांट की ओर से धुआं और धूल निकलने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि आसपास रहने वाले लोगों को इससे संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की चिंता है। नगरनार स्टील प्लांट के प्रदूषण संबंधी आरोप (NMDC Pollution Allegations) की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन और पर्यावरणीय निगरानी के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। सिर्फ आरोपों के आधार पर प्रदूषण की मात्रा या स्वास्थ्य पर असर का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। संबंधित विभागों की वैज्ञानिक जांच और रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि वायु या जल गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
यह भी पढ़ें : Abhanpur Murder Case : पत्नी के चरित्र पर विवाद, बेटे ने चाकू से वार कर पिता की हत्या की
मुआवजा कब मिलेगा
स्थानीय लोगों का कहना है कि फसल नुकसान की शिकायतों के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। हालांकि, कितने किसानों की फसल प्रभावित हुई, नुकसान का कोई सर्वे कराया गया या मुआवजे के लिए औपचारिक आवेदन दिए गए हैं, इसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। क्या किसानों की शिकायतों का विधिवत पंजीयन हुआ है? क्या प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया गया? क्या पानी और मिट्टी के नमूने लेकर जांच कराई गई? यदि फसल नुकसान की पुष्टि होती है, तो पात्र किसानों को राहत देने की प्रक्रिया क्या होगी? नगरनार में प्रदूषण की शिकायतें (NMDC Pollution Allegations) उठने के बाद इन सवालों पर स्पष्ट जवाब जरूरी हैं।
जांच के बिना कैसे मिलेगी राहत
मामले में जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। संबंधित एजेंसियों को शिकायतों की जांच कर खेतों, जलस्रोतों और आसपास की वायु गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन करना चाहिए। साथ ही, प्लांट से जुड़े उत्सर्जन और अपशिष्ट जल प्रबंधन के रिकॉर्ड की भी नियमानुसार जांच की जा सकती है। यदि जांच में प्रदूषण या पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फसल नुकसान का संबंध भी जांच से स्थापित होता है, तो पात्र किसानों को राहत और मुआवजे के मामले में नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए। नगरनार के किसानों की शिकायतों को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें जांच की स्थिति, निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। आखिर खेतों तक काला पानी पहुंचने के आरोपों की सच्चाई क्या है और किसानों को राहत कब मिलेगी? इसका जवाब आधिकारिक जांच और दस्तावेजों से ही सामने आएगा।
नोट: काले पानी, फसल नुकसान, जीव-जंतुओं की मौत, धुएं-धूल और मुआवजा नहीं मिलने संबंधी दावे स्थानीय लोगों के आरोपों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।



