सीजी भास्कर, 09 अप्रैल । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आज एक अहम फैसला सुनाते हुए जोहार छत्तीसगढ़िया पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल को अंतरिम राहत (Chhattisgarh High Court) दे दी है। गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने बघेल के खिलाफ दर्ज एक साथ कई एफआईआर के मामले में उन्हें जमानत का लाभ दिया। यह पूरा मामला रायपुर के वीआईपी चौक पर ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की प्रतिमा के अपमान के बाद दिए गए एक सार्वजनिक बयान से जुड़ा है, जिसके बाद उनके खिलाफ राजधानी के अलग-अलग थानों में कानूनी शिकंजा कसा गया था।
विवादित बयान और थानों के चक्कर: क्या था पूरा मामला?
अमित बघेल के विरुद्ध तेलीबांधा, कोतवाली और देवेंद्र नगर जैसे प्रमुख थानों में कुल 14 एफआईआर दर्ज की गई थीं। ये सभी शिकायतें उस प्रेस वक्तव्य के आधार पर दर्ज हुई थीं, जो उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के विखंडन की घटना के बाद दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। लंबी बहस के बाद कोर्ट ने बघेल को 3 महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
जमानत के साथ जुड़ी जिले से बाहर रहने की विशेष शर्त
हाईकोर्ट ने अमित बघेल को जमानत देते वक्त एक बहुत ही महत्वपूर्ण शर्त रखी है। इस शर्त के मुताबिक, अगले 3 महीनों तक वह रायपुर जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर कदम नहीं रख सकेंगे और न ही वहां निवास कर पाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उन्हें जिले से बाहर रहना होगा। हालांकि, राहत के तौर पर केवल इतना कहा गया है कि यदि निचली अदालत में उनकी पेशी की तारीख तय होती है, तो वे केवल सुनवाई में शामिल होने के लिए रायपुर जिले में प्रवेश कर सकेंगे।
अदालत में वकीलों के बीच चली लंबी जिरह
सुनवाई के दौरान अमित बघेल की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने अपना पक्ष रखा और मामले में राहत की मांग की। दूसरी तरफ, जमानत का विरोध करने के लिए आपत्तिकर्ता की ओर से सुनील ओटवानी और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने कोर्ट में पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने इस शर्त के साथ आदेश पारित किया, जिससे फिलहाल अमित बघेल को जेल से बाहर आने का रास्ता मिल गया है।


