सीजी भास्कर, 8 अगस्त 2026 : बेमेतरा में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने CMHO पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना, महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित आचरण, प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के नियमों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ ने कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति को ज्ञापन सौंपकर CMHO को पद से हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
समीक्षा बैठकों में अभद्रता का आरोप
संघ के प्रांताध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि समीक्षा बैठकों के दौरान कर्मचारियों और महिला CHO की पात्रता एवं पद का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाया जाता है। संघ ने महिला कर्मचारियों पर लेजर लाइट डालने, बिना अनुमति स्पर्श करने और अशोभनीय भाषा के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि CHO को घंटों खड़ा रखकर समीक्षा बैठक की जाती है। इसके अलावा गोपनीय चरित्रावली खराब करने, नौकरी से निकालने, FIR दर्ज कराने और “निपटा देने” जैसी कथित धमकियां देकर कर्मचारियों में भय का माहौल बनाया जा रहा है।
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आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की सेवाओं पर असर Bemetara CMHO Controversy
CHO संघ ने आरोप लगाया कि एकल पदस्थापना वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात कर्मचारियों पर लगातार फील्ड विजिट, सर्वे और सेक्टर स्तरीय बैठकों में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके कारण कई बार CHO को उप-स्वास्थ्य केंद्र बंद कर बैठकों में जाना पड़ता है।
संघ का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर सप्ताह में कई दिनों तक बंद रहने की स्थिति बन रही है। इसका सीधा असर ओपीडी, दवा वितरण और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
NHM के नियमों के उल्लंघन का आरोप
संघ ने आरोप लगाया है कि CHO से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (TOR) के विपरीत काम कराया जा रहा है। ANM, MPW और RHO से संबंधित कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी CHO पर डालने का दावा किया गया है।
इसके अलावा बिना स्पष्ट लिखित आदेश के वेतन रोकने और मुख्यालय में निवास करने के नाम पर कथित रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया गया है। संघ ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों और गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
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महिला कर्मचारियों के आरोपों पर POSH जांच की मांग
CHO संघ ने महिला कर्मचारियों से जुड़े आरोपों की जांच कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित POSH Act, 2013 के तहत कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समिति गठित की जानी चाहिए।
संघ ने यह भी मांग की है कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए CMHO को तत्काल वर्तमान पद से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। इसके साथ ही रोके गए वेतन को तत्काल जारी करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
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7 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
CHO संघ ने प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। संघ का कहना है कि यदि ज्ञापन सौंपे जाने के सात दिनों के भीतर ठोस और प्रभावी कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
संघ ने धरना-प्रदर्शन और अन्य वैधानिक लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध करने की चेतावनी दी है। हालांकि, CMHO की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में प्रशासन की जांच और दोनों पक्षों के बयान के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।



