सीजी भास्कर, रायपुर, 01 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का आंदोलन तेज होने जा रहा है। प्रदेश के 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (Chhattisgarh CHO Protest) आगामी 5 नवंबर 2026 को नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का घेराव करेंगे। लंबित इंसेंटिव भुगतान, कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई, काम के बढ़ते बोझ और नौकरी से निकालने की धमकियों को लेकर संघ ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों से घेराव से पहले मांगों पर निर्णय लेने की अपील की है।
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3-4 साल से भुगतान का इंतजार
संघ का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को अपनी प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए पिछले 3 से 4 वर्षों से लगातार आंदोलन, ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। संघ के मुताबिक, शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन राशि का भुगतान हर महीने होना चाहिए, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को बार-बार आवाज उठानी पड़ रही है। संघ ने दावा किया है कि राज्य कार्यालय की ओर से प्रत्येक माह की 10 तारीख तक PLP पोर्टल के माध्यम से सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद जिला और ब्लॉक स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। सत्यापन और भुगतान में महीनों की देरी के साथ पोर्टल संबंधी अनियमितताएं भी बनी हुई हैं।
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इंसेंटिव कार्रवाई पर सवाल
संघ ने आरोप लगाया है कि इंसेंटिव घोटाले के नाम पर जारी आदेशों और जांच में केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। जबकि प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रदर्शन और उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर के विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित होती है। संघ का कहना है कि यदि किसी तरह की अनियमितता की जांच की जाती है, तो संबंधित संस्था के सभी कर्मचारियों की भूमिका, कार्य-विभाजन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किसी एक संवर्ग को चुनकर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।
काम का बोझ और नौकरी की चिंता
संघ के मुताबिक, उप स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध मानव संसाधन और कार्य-विभाजन की स्थिति को नजरअंदाज कर संस्थागत कार्यों, ऑनलाइन प्रविष्टियों और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का अतिरिक्त भार केवल CHOs पर डाला जा रहा है। इसके अलावा कई जिलों में अधिकारियों की ओर से नौकरी से निकालने की धमकी दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। संघ का कहना है कि इससे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों में असुरक्षा और असंतोष का माहौल बन रहा है।
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संघ की पांच प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने आंदोलन के तहत पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं।
- इंसेंटिव घोटाले के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के विरुद्ध जारी कथित द्वेषपूर्ण और अनुचित आदेश निरस्त या संशोधित किए जाएं। साथ ही पिछले 7-8 माह की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए।
- प्रोत्साहन राशि के भुगतान में लगातार हो रही अनियमितताओं को समाप्त करने के लिए इसे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के मूल वेतन में समायोजित किया जाए।
- उप स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ सभी कर्मचारियों के कार्य-दायित्वों (TOR) का पुनरीक्षण कर प्रत्येक पद के अनुसार स्पष्ट और न्यायसंगत कार्य-विभाजन किया जाए।
- सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के बाद निर्धारित ग्रेड के विपरीत प्रोत्साहन राशि के भुगतान के मामले की जांच हो। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ भुगतान की अंतर राशि दी जाए।
- हर महीने की 10 तारीख तक प्रोत्साहन राशि के सत्यापन और भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करने वाले जिला एवं ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनके आर्थिक हितों, कार्य परिस्थितियों और सेवा संबंधी समस्याओं की लगातार अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य कार्यालय के आदेशों का पालन जिला और ब्लॉक स्तर पर सुनिश्चित नहीं कराया जा सकता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मांगें नहीं मानीं तो बढ़ेगा आंदोलन
संघ ने शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि 5 नवंबर को प्रस्तावित घेराव से पहले सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर ठोस और समयबद्ध निर्णय लिया जाए। प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपने अधिकारों, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा के लिए एकजुट होकर स्वास्थ्य भवन का घेराव करेंगे। संघ के मुताबिक, मांगों का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक एवं चरणबद्ध रूप दिया जाएगा।
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