सीजी भास्कर, रायपुर, 30 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया है, लेकिन इस फैसले से कर्मचारी संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि केवल महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा काफी नहीं है। कर्मचारियों को इसका लाभ वास्तविक देय तिथि से मिलना चाहिए और पिछले महीनों का बकाया एरियर्स (DA Arrears) भी जारी किया जाना चाहिए। संजय शर्मा, प्रदीप पांडेय और राजेश चटर्जी ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में मांग उठाई है।
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2% बढ़ोतरी से असंतोष
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षक और कर्मचारियों के मन में इस बात की कसक है कि अलग राज्य बनने के बाद भी उन्हें महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) के भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 10 महीने पहले ही 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते के एरियर्स देने की बात कही थी, जबकि छत्तीसगढ़ में 10 महीने बाद यानी 1 नवंबर से केंद्र के अनुरूप 2 प्रतिशत DA देने की घोषणा की गई है। संजय शर्मा के मुताबिक, कर्मचारियों को वास्तविक देय तिथि से बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन प्रदेशवासियों की खुशहाली और विकास के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन आज कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए दूसरे राज्यों से तुलना करनी पड़ रही है।
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88 महीने से अंतर का दावा
संजय शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश के लगभग चार लाख कर्मचारियों को करीब 88 महीने से महंगाई भत्ते के भुगतान में अंतर का नुकसान उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि बढ़े हुए DA का लाभ समय पर नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दीपावली के मौके पर भी कर्मचारियों की निराशा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स (DA Arrears Payment) जारी करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, बकाया राशि का भुगतान होने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उनका मनोबल भी बढ़ेगा।
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केंद्र की तर्ज पर भुगतान
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने भी महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 3 प्रतिशत DA बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जुलाई से 63 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को फिलहाल 60 प्रतिशत DA मिलेगा।
पांडेय के मुताबिक, राज्य कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नवंबर से देने की बात कही जा रही है, जबकि इसका लाभ जनवरी 2026 से मिलना चाहिए था। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार जब भी महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करे, उसी वास्तविक देय तिथि से छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को भी इसका लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर पड़ता है। ऐसे में DA भुगतान में देरी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की है।
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पेंशनर्स के DR पर सवाल
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश चटर्जी ने भी राज्य सरकार की DA और DR व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवकों और पेंशनर्स के लिए की गई घोषणाओं को लागू करने में सरकार अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है।
चटर्जी ने केंद्र और राज्य के महंगाई भत्ते तथा महंगाई राहत (DR) के आंकड़ों की तुलना करते हुए सवाल किया कि जब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 63 प्रतिशत DA मिल रहा है, तो छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों को 60 प्रतिशत और पेंशनर्स को 58 प्रतिशत DR ही क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों और पेंशनर्स पर भी पड़ता है। ऐसे में उन्हें भी केंद्र के समान महंगाई भत्ते और महंगाई राहत (Dearness Relief) का लाभ मिलना चाहिए।
एरियर्स भुगतान की मांग
महंगाई भत्ते को लेकर अलग-अलग शिक्षक संगठनों के नेताओं ने सरकार के सामने एक जैसी मांग रखी है। उनका कहना है कि केवल DA बढ़ाने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ वास्तविक देय तिथि से मिलना चाहिए और पिछले महीनों का लंबित एरियर्स भी जारी किया जाना चाहिए। फिलहाल कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर विचार कर बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर जल्द निर्णय लेगी।
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