सीजी भास्कर, 9 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ को जल्द अपनी पहली राजकीय तितली मिल सकती है। वन विभाग ने चयन की प्रक्रिया (Chhattisgarh State Butterfly) शुरू कर दी है। इसके लिए कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल को अंतिम सूची में शामिल किया गया है। प्रदेश में अब तक तितलियों की 201 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण हो चुका है। इनमें 19 प्रजातियां सर्वे के दौरान पहली बार दर्ज की गईं।
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तीन प्रजातियां दौड़ में
राजकीय तितली के चयन (Chhattisgarh State Butterfly) के लिए तीन प्रजातियों को अंतिम सूची में रखा गया है। चयन के दौरान उनकी उपलब्धता, पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण मूल्य, विशिष्ट पहचान और लोगों के आकर्षण जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
- कॉमन बैंडेड पीकॉक
- ऑरेंज ओकलीफ
- स्पॉट स्वॉर्डटेल
इनमें से चुनी जाने वाली तितली प्रदेश की जैव विविधता की प्रतीक बनेगी। हालांकि, अंतिम चयन की घोषणा होना अभी बाकी है।
छह साल में मिले नए रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में तितलियों की प्रजातियों की पहचान के लिए वर्ष 2019 से 2024 तक सभी 33 जिलों में सर्वे किया गया। पहले प्रदेश में 182 प्रजातियों का रिकॉर्ड उपलब्ध था। सर्वे में 19 नई प्रजातियां दर्ज होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 201 हो गई। यह सर्वे (Chhattisgarh State Butterfly) की पहचान के साथ प्रदेश की जैव विविधता को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तितलियां पर्यावरण और प्राकृतिक आवासों की स्थिति को समझने में मदद करती हैं।
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बस्तर में तितलियों की दुनिया
बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 252 से अधिक तितली प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। यहां के जंगल, जलस्रोत, घासभूमि और विविध वनस्पतियां तितलियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। कांगेर घाटी में कॉमन जेम, ऑरेंज ओकलीफ, ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और कॉमन मैप जैसी प्रजातियां भी देखी जाती हैं। अक्टूबर से फरवरी के बीच तितलियों की गतिविधियां देखने के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
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संरक्षण से जुड़ी है पहचान
राजकीय तितली (Chhattisgarh State Butterfly) चुनने के साथ उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना भी अहम होगा। जंगलों, जलस्रोतों और वनस्पतियों का संरक्षण तितलियों के अस्तित्व के लिए जरूरी है। कांगेर घाटी जैसे जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों में तितलियों की मौजूदगी प्रकृति संरक्षण और पर्यटन की संभावनाओं को भी रेखांकित करती है। राजकीय तितली की घोषणा से प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिल सकती है।
आंकड़ों पर एक नजर
- 201: छत्तीसगढ़ में दर्ज तितली प्रजातियां
- 19: सर्वे में पहली बार दर्ज प्रजातियां
- 33: सर्वे में शामिल जिले
- 3: अंतिम सूची में शामिल प्रजातियां
- 2019–2024: राज्यव्यापी सर्वे की अवधि
- 252 से अधिक: कांगेर घाटी में दर्ज तितली प्रजातियां
छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली (Chhattisgarh State Butterfly) का चयन प्रदेश की जैव विविधता को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अंतिम निर्णय के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि तीनों प्रजातियों में से किसे राज्य के प्रतीक के रूप में चुना जाता है।



