1993 का रिकॉर्ड भी टूटा : Indian Stock Market
इससे पहले दिवाली से पहले सात दिनों में निफ्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1993 में दर्ज किया गया था, जब इसमें 7.5 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं, 2020 में निफ्टी 6.8 फीसदी चढ़ा था। इस बार निफ्टी ने इन दोनों रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सेंसेक्स में भी 10.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जो इस अवधि का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार में खरीदारी की। इस दौरान उन्होंने करीब 18,661 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके अलावा अक्टूबर के उच्चतम स्तर से बॉन्ड यील्ड में 35 से 40 बेसिस पॉइंट की गिरावट भी बाजार के लिए सकारात्मक रही।
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शेयर बाजार में तेजी की क्या रही वजह?
बाजार में आई तेजी के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। फरवरी 2027 में पेश होने वाले बजट में सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स की समीक्षा कर सकती है। वहीं, अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजों से वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट (Indian Stock Market) आई और यह 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी मई 2026 के करीब 5.3 फीसदी के स्तर से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आने से भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है और विदेशी निवेशकों की बाजार में वापसी का रास्ता खुल सकता है।
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आगे बाजार में जारी रह सकती है तेजी, लेकिन चुनौतियां भी
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी आने वाले कुछ हफ्तों तक जारी रह सकती है। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है। वित्तीय क्षेत्र के कई बड़े शेयरों में अभी भी तेजी की गुंजाइश बताई जा रही है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश और दूसरे उभरते बाजारों में बेहतर अवसर (Indian Stock Market) भारत में विदेशी पूंजी के प्रवाह को सीमित कर सकते हैं।
तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,600 का स्तर अहम बाधा माना जा रहा है। इसके ऊपर टिके रहने पर इंडेक्स 24,800 से 25,000 तक पहुंच सकता है। वहीं, 24,300 से 24,400 के बीच सपोर्ट मिलने की संभावना है। अगर निफ्टी 24,079 से 24,130 के दायरे तक फिसलता है, तो इसमें दोबारा गिरावट आ सकती है और यह 23,700 के स्तर तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की लंबी अवधि की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, देश के बाहरी आर्थिक संतुलन और कंपनियों की कमाई में स्थिरता पर निर्भर करेगी। ऐसे में दिवाली से पहले की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखनी होगी।
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