सीजी भास्कर, रायगढ़, 23 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जलाशय (Khammar Pakut Reservoir Fish Farming) आदिवासी मछुआ परिवारों की कमाई का मजबूत जरिया बन रहा है। लैलूंगा विकासखंड के खम्हार पाकुट जलाशय में मछली पालन कर 52 आदिवासी मछुआ सदस्यों की समिति ने 75 क्विंटल मछली का उत्पादन किया। मछलियों की बिक्री से समिति को 10.50 लाख रुपये की आय हुई, जिसमें खर्च निकालने के बाद 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला।
स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से रोजगार और आमदनी बढ़ाने की इस पहल में जिला प्रशासन और मत्स्य पालन विभाग का सहयोग भी मिला है। समिति के सदस्य सामूहिक रूप से मछली पालन, उत्पादन और बिक्री का काम कर रहे हैं।
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191 हेक्टेयर में मछली पालन
लैलूंगा विकासखंड स्थित खम्हार पाकुट सिंचाई जलाशय का औसत जलक्षेत्र 191.340 हेक्टेयर है। समिति ने इस जलाशय को 10 साल के पट्टे पर लेकर मछली पालन शुरू किया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से सदस्यों को प्रशिक्षण और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए।
इस पहल से (Khammar Pakut Reservoir Fish Farming) के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। समिति के सदस्य मिलकर उत्पादन और बिक्री करते हैं, जिससे सामूहिक आय अर्जित करने में मदद मिल रही है।
दो लाख मछली बीज से उत्पादन
समिति के सदस्यों के मुताबिक, जलाशय में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब दो लाख मछली बीज यानी फिंगरलिंग डाले गए थे। इसके बाद कुल 75 क्विंटल मछली का उत्पादन हुआ। मछलियों की बिक्री से 10.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। खर्चों के बाद समिति को 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। यह कमाई (Khammar Pakut Reservoir Fish Farming) को आदिवासी मछुआ सदस्यों के लिए आजीविका के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में सामने लाती है।
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प्रशिक्षण और उपकरणों से मदद
मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत समिति के सदस्यों को मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया। विभाग की ओर से मछली पकड़ने के लिए जाल और मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए आइस बॉक्स भी उपलब्ध कराए गए।
इन संसाधनों से मछली पकड़ने, रखरखाव और बिक्री के काम में सुविधा मिली है। समिति के 52 सदस्य मिलकर इन गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। (Khammar Pakut Reservoir Fish Farming) की यह पहल स्थानीय संसाधनों से आय बढ़ाने और आदिवासी परिवारों को आर्थिक संबल देने का उदाहरण है।
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